अनिकेत सिंह
यूरोप एक ऐसा क्षेत्र है, जहां वसंत ऋतु के दौरान सामान्यतः 18-20 डिग्री तापमान रहता था। यहां अब औसत तापमान 35 डिग्री तक पहुंच गया है। यह वास्तव में आश्चर्यजनक और चिंताजनक घटना है। जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) और वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण यूरोप में हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ गई हैं।यूरोप के वे देश जो अपनी ठंडक के लिए तथा विशेष रूप से मई और जून महीनों में घूमने के लिए अच्छे पर्यटन स्थलों के रूप में जाने जाते हैं, वहां पिछले कुछ समय से गर्मी पड़ रही है। इस बार तो हाहाकार मच गया है। फ्रांस में हीटवेव की स्थिति अत्यंत भयावह है। यहां गर्मी के कारण पानी में नहाने जाने के दौरान कुल 40 लोगों की मृत्यु होने की भी रिपोर्टें हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यहां सामान्यतः जुलाई के अंत में थोड़ी गर्मी पड़ती है, लेकिन इस बार मई तथा उसके बाद जून महीने में भी लोगों की हालत खराब हो गई है। जून महीने के अंत में रिकार्ड तोड़ गर्मी पड़ी है।जानकारों के अनुसार यूरोप में ऐसी गर्मी पड़ना वास्तव में चिंताजनक और भयावह है। यूरोप के विभिन्न देशों में अस्पताल भरने लगे हैं, आपातकालीन सेवाओं में लगातार फोन बज रहे हैं। लोगों को डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, आंखों में जलन तथा सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो रही हैं।उल्लेखनीय है कि यूरोप के एक बड़े हिस्से अर्थात अनेक देशों में भीषण हीटवेव की स्थिति है। यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। गर्मी के कारण कई लोगों की मृत्यु भी हुई है। फ्रांस से लेकर इटली और इंग्लैंड तक लोग गर्मी से परेशान हैं। अधिकांश देशों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हो गई हैं। फ्रांस में जिन 40 लोगों की मृत्यु हुई, उनमें दो बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी कार में बंद रह जाने के कारण मृत्यु हो गई।वैश्विक मौसम एजेंसियों का मानना है कि यूरोप अब दुनिया की तुलना में औसतन दोगुनी गति से गर्म हो रहा है। यूरोप के इतिहास में पहली बार यहां मई महीने में और जून के अंत तक भयंकर लू का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार यूरोप के ऊपर एक हाई प्रेशर सिस्टम सक्रिय हुआ है, जिसे ओमेगा ब्लॉक कहा जाता है। इसके कारण भयंकर गर्मी पड़ रही है। ओमेगा ब्लॉक के कारण हीट डोम बना है और उत्तरी अफ्रीका से आने वाली गर्म हवाएं पश्चिमी तथा मध्य यूरोप के ऊपर पहुंचकर रुक गई हैं। इसके कारण यूरोप भीषण गर्मी में तप रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार इस बार यूरोप में इतनी भीषण गर्मी पड़ने के पीछे अनेक कारण जिम्मेदार हैं। इनमें वैज्ञानिक तथा भौगोलिक कारणों का बड़ा योगदान है। फिर भी इस बार सबसे बड़ा कारक हीट डोम बना है। इस हीट डोम के लिए ओमेगा ब्लॉक जिम्मेदार सिद्ध हो रहा है। इस बार यूरोप में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भीषण गर्मी पड़ी है तथा हीटवेव का स्तर भी अधिक है। हीटवेव के अत्यधिक प्रचंड होने के पीछे सबसे बड़ा कारण हीट डोम है। यह पर्यावरण से जुड़ी एक गंभीर घटना है।शोधकर्ताओं का कहना है कि जब किसी क्षेत्र के वातावरण में उच्च-दाब प्रणाली मजबूत हो जाती है, तो वह धरती की गर्म हवा को ऊपर उठने नहीं देती। इसके कारण गर्म हवा एक ही स्थान पर अटक जाती है। उत्तरी अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवा इस बार यूरोप में रुक गई है। यूरोप में मौजूद हाई प्रेशर सिस्टम के कारण गर्म हवा वहीं ठहर गई और हीटवेव का हमला शुरू हो गया। यह उच्च-दाब प्रणाली गर्म हवा को और नीचे की ओर दबाती है, जिससे हवा और अधिक गर्म होकर फैलती है। इसके कारण आकाश बिलकुल साफ रहता है तथा तीव्र सूर्यप्रकाश सीधे धरती तक पहुंचता है, जिससे तापमान में अत्यधिक वृद्धि होती है।सामान्य रूप से देखा जाए तो ओमेगा ब्लॉक और हीट डोम में अंतर है। वर्तमान में यूरोप में जो स्थिति बनी है वह ओमेगा ब्लॉक है और उसका परिणाम हीट डोम है। यूरोप में हीट डोम का निर्माण सामान्यतः मई महीने में होता है। इस बार मई और जून दोनों महीनों में भयानक तथा असहनीय गर्मी पड़ी है। ओमेगा एक वायुमंडलीय घटना (फेनोमेना) है, जबकि हीट डोम उसका परिणाम है।उल्लेखनीय है कि हीट डोम के कारण ब्रिटेन की स्थिति भी खराब हो गई है। वहां तापमान 39 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है।read more:https://pahaltoday.com/shailendra-kumar-dwivedi-a-pharmacist-posted-at-the-community-health-center-visheshwarganj-became-the-district-president-of-the-health-department/जून महीने में यह अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज हो सकता है।उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में अब तक 1957 और 1976 में 35.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था। अब इसमें लगभग चार डिग्री तक की वृद्धि हो सकती है।ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार हीट डोम के कारण गर्मी असहनीय रूप से बढ़ गई है और इसी वजह से देशव्यापी हीट हेल्थ अलर्ट जारी किया गया है। यह अत्यधिक गर्मी सामान्य और स्वस्थ लोगों के लिए भी अत्यंत कठिन साबित हो सकती है। वर्तमान में इंग्लैंड के सात क्षेत्रों में अगले तीन दिनों तक रेड अलर्ट जारी किया गया है। ब्रिटेन के कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी है, जबकि लंदन में वर्षा जैसा मौसम बना हुआ है। इसके कारण एक ही देश में मौसम में अत्यधिक विरोधाभासी परिवर्तन देखने को मिल रहा है।उल्लेखनीय है कि दूसरी ओर फ्रांस भी इस गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। कुछ क्षेत्रों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। त्वचा झुलसा देने वाली गर्मी के कारण देश के अनेक बड़े क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी से बचने के लिए लोग नदियों और झीलों की ओर जा रहे हैं। इसके कारण डूबने से भी कुछ लोगों की मृत्यु हुई है।हाल ही में मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी कि 2003 में फ्रांस में पड़ी ऐतिहासिक गर्मी जैसी स्थिति फिर से बन सकती है। उस समय फ्रांस में 15 हजार लोगों की मृत्यु हुई थी।इसके अलावा स्पेन और इटली में भी पहली बार इतनी भीषण गर्मी पड़ी है। स्पेन में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया है। वहां जंगलों में आग लगने की चेतावनी भी जारी की गई है। दूसरी ओर इटली में भी तापमान और बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है। वैज्ञानिक और विशेषज्ञ स्पष्ट रूप से मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही यूरोप में यह स्थिति उत्पन्न हुई है। यूरोप एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ वसंत ऋतु के दौरान सामान्यतः 18-20 डिग्री तापमान रहता था। अब वहां औसत तापमान 35 डिग्री तक पहुंच गया है। यह वास्तव में आश्चर्यजनक और चिंताजनक स्थिति है।उल्लेखनीय है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीनहाउस गैसों में लगातार वृद्धि हो रही है और इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी का औसत तापमान भी बढ़ रहा है। इसका प्रभाव यूरोप पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्तमान समय में यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है।ग्लोबल वार्मिंग के कारण वहां का ऋतुचक्र पूरी तरह बदलता जा रहा है। भारत और एशिया के अन्य देशों में पड़ने वाली गर्मी तो पहले से ही तीव्र है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण ठंडे क्षेत्रों के रूप में पहचाने जाने वाले यूरोपीय देश भी गर्म होते जा रहे हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।ओमेगा वास्तव में यूनानी (ग्रीक) वर्णमाला का एक अक्षर है। इसके शाब्दिक अर्थ की बात करें तो इसे “ग्रेट ओ” कहा जाता है। यह ग्रीक वर्णमाला का 24वां और अंतिम अक्षर है, इसलिए इसे समाप्ति अथवा अंतिम सीमा का प्रतीक भी माना जाता है। भौतिकी तथा कंप्यूटर विज्ञान में भी ओमेगा प्रतीक का उपयोग किया जाता है। ओमेगा के प्रतीक का आकार ही वह कारण है जिसके चलते मौसम विज्ञान में इसका उपयोग किया जाता है। ओमेगा ब्लॉक वास्तव में वायुमंडल की एक स्थिर स्थिति है, जहां एक उच्च-दाब प्रणाली सक्रिय हो जाती है। यह दो निम्न-दाब धाराओं (लो प्रेशर सिस्टम) के बीच सैंडविच की तरह फंस जाती है। इसके कारण मौसम में होने वाला कोई भी बड़ा परिवर्तन लंबे समय तक बना रहता है। यह आकृति यूनानी अक्षर ओमेगा जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया है।दूसरी ओर, हीट डोम तब बनता है जब ओमेगा ब्लॉक के कारण वायुमंडलीय स्थिति एक ही स्थान पर स्थिर हो जाती है। वर्तमान परिस्थितियों में उच्च-दाब प्रणाली का एक विशाल क्षेत्र ऊपरी वायुमंडल में स्थिर हो गया है। यह नीचे की गर्म हवाओं को उसी प्रकार रोक देता है, जैसे किसी गर्म बर्तन पर ढक्कन रख दिया गया हो। परिणामस्वरूप गर्मी उसी क्षेत्र में फंसी रहती है। यूरोप के ऊपर वर्तमान में ऐसी ही दाब-प्रणाली रुकी हुई है और गर्मी आगे बढ़ नहीं पा रही है। इसी कारण वहां असहनीय गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है।