कागजों में रोशनी, जमीन पर पूरी रात अंधेरा! मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र में आखिर कब खत्म होगा बिजली का खेल?

आजमगढ़ । मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र की बदहाल बिजली व्यवस्था अब पूरे क्षेत्र में जनआक्रोश का कारण बनती जा रही है। क्षेत्र के लोग आरोप लगा रहे हैं कि विभागीय रिकॉर्ड में भले ही पर्याप्त बिजली आपूर्ति दिखाई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। गांवों में घंटों बिजली गायब रहती है, कई बार पूरी पूरी रात आपूर्ति नहीं होती और बिजली आने जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। इससे आम लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।मंगरावा, मखदुमपुर, वजीरमलपुर, खालिसपुर, कोइलाडीह, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, रानीपुर रजमों, दयालपुर, मोहम्मदपुर, फरिहा, अबूसैदपुर समेत दर्जनों गांवों के लोग लगातार बिजली संकट झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार 24 घंटे में मुश्किल से एक से दो घंटे बिजली मिलती है। जब बिजली आती भी है तो बार बार ट्रिपिंग, लो वोल्टेज और फीडर बदलने के कारण कुछ ही मिनटों में आपूर्ति बाधित हो जाती है। कई बार कोइलाडीह और साउथ फीडर को आधा आधा घंटा बिजली देकर आपूर्ति पूरी होने का दावा किया जाता है, जबकि किसी भी गांव को लगातार बिजली नहीं मिल पाती।सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिजली आने और जाने का कोई निर्धारित समय नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग एक तय समय सारिणी जारी कर दे और उसी के अनुसार बिजली दे, तो लोगों की आधी परेशानियां अपने आप समाप्त हो जाएंगी। किसान अपनी सिंचाई की योजना बना सकेंगे, छात्र पढ़ाई का समय तय कर सकेंगे और छोटे व्यापारी अपना काम व्यवस्थित कर पाएंगे।ग्रामीणों ने बताया कि बड़ी संख्या में मजदूर रोजी रोटी के लिए दूसरे क्षेत्रों में काम करते हैं। कई मजदूर खेत की सिंचाई के लिए छुट्टी लेकर घर लौटते हैं, लेकिन पूरी रात बिजली ही नहीं आती। न खेत की सिंचाई हो पाती है।read more:https://pahaltoday.com/prerna-yatra-organized-on-mangal-pandey-martyrdom-day-and-bankim-chandra-chattopadhyays-death-anniversary/ और न मजदूरी का नुकसान वापस मिलता है। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई नहीं होने से फसल प्रभावित होती है, जिससे आर्थिक नुकसान अलग झेलना पड़ता है।दूसरी ओर स्मार्ट मीटर की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब नियमित बिजली ही उपलब्ध नहीं है, तब प्रीपेड रिचार्ज और बढ़ते बिलों का बोझ उन पर क्यों डाला जा रहा है। लोगों का सवाल है कि यदि बिजली नहीं मिल रही तो रिचार्ज किस सुविधा का कराया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि जर्जर पोल, नीचे लटकते तार, पुराने ट्रांसफार्मर और बार बार होने वाले फॉल्ट की शिकायतें लंबे समय से की जा रही हैं। विभागीय अधिकारी हर बार जल्द सुधार का आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान दिखाई नहीं देता। इससे लोगों का भरोसा लगातार कमजोर होता जा रहा है।क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि विभाग के रिकॉर्ड में वास्तव में पर्याप्त बिजली आपूर्ति दर्ज है, तो फिर गांवों में पूरी पूरी रात अंधेरा क्यों रहता है। यदि आपूर्ति में तकनीकी बाधाएं हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए और यदि कोई अन्य कारण है तो उसके समाधान की समयबद्ध योजना घोषित की जाए।ग्रामीणों ने मांग की है कि मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र की बिजली व्यवस्था का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए, प्रत्येक फीडर की वास्तविक आपूर्ति का विवरण सार्वजनिक किया जाए, जर्जर विद्युत ढांचे का तत्काल नवीनीकरण किया जाए तथा बिजली आपूर्ति का निश्चित समय निर्धारित कर उसका पालन सुनिश्चित कराया जाए।क्षेत्र की जनता का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिस पर भरोसा किया जा सके। क्योंकि बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि खेती, रोजगार, शिक्षा, व्यापार और सामान्य जीवन का आधार है।

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