गाजीपुर जमानियां। मोहर्रम पर्व के दौरान ताजियेदारों और अखाड़ों की पारंपरिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खलीफा निशात खान वारसी एवं अमन खान गांधी ने एक सराहनीय पहल करते हुए विभिन्न इमाम चौकों पर पहुंचकर ताजियेदारों को पगड़ी बांधकर तथा शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह ने ताजियेदारों और अखाड़ेबाजों में नया उत्साह भर दिया।
शनिवार की शाम आयोजित कार्यक्रम में खलीफा निशात खान वारसी ने कहा कि मोहर्रम केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और परंपराओं को संजोए रखने का भी संदेश देता है। मोहर्रम के अवसर पर युवा और बुजुर्ग अखाड़ों में अपनी शारीरिक दक्षता तथा पारंपरिक हथियारों के अद्भुत करतब प्रस्तुत करते हैं,read more:https://pahaltoday.com/american-president-under-siege/ जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अनुशासित एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अखाड़ेबाजों तथा ताजियेदारों का सम्मान करने से उनका मनोबल बढ़ता है और नई पीढ़ी भी इन ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होती है। इसी क्रम में मरहूम नेहाल शेख मंसूरी के छोटे भाई एवं ताजियेदार सलीम मंसूरी को पगड़ी बांधकर तथा शील्ड भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान समारोह मोहर्रम की परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मान प्राप्त करने वाले ताजियेदारों ने भी खलीफा निशात खान वारसी और अमन खान गांधी का आभार व्यक्त किया।