उन्नति का सेतु: आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण की अपरिहार्यता

KRISHNA KUMAR TIWARI

आज के समय में केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं है। तकनीकी कौशल के साथ- साथ डिजिटल साक्षरता, समस्या समाधान क्षमता और संचार कौशल जैसे सॉफ्ट स्किल्स को भी TVET पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। तकनीक के तेजी से बदलने के कारण, एक बार सीखा गया कौशल कुछ ही वर्षों में पुराना हो सकता है।इसलिए, सरकारों और कॉरपोरेट्स को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहां श्रमिक अपने पूरे करियर के दौरान कभी भी आकर अपनी रीस्किलिंग  या अपस्किलिंग कर सकें।कनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (TVET)केवल एक शैक्षणिक विकल्प नहीं है, बल्कि यह स्थानीय आत्मनिर्भरता और वैश्विक आर्थिक संप्रभुता को प्राप्त करने की एक रणनीतिक अनिवार्यता है। यह समावेशन का एक ऐसा साधन है जो समाज के वंचित वर्गों को सीधे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ता है। यदि वैश्विक स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों विशेष रूप से SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 8   (सार्थक कार्य और आर्थिक विकास) को प्राप्त करना है, तो सरकारों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों को एक साथ आकर को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखना होगा। कुशल हाथ ही एक समृद्ध स्थानीय समाज और एक प्रगतिशील वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। चौथी औद्योगिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वचालन (Automation), और हरित प्रौद्योगिकियों (GreenTechnologies) के तेजी से होते विकास ने पारंपरिक रोजगार परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है।read more:https://worldtrustednews.in/yogi-government-working-to-make-youth-skilled-in-line-with-industry-demand/इस बदलते दौर में, किसी भी देश की आर्थिक रीढ़  इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसके पास कितनी डिग्रियां हैं, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि उसकी कार्यबल के पास व्यावहारिक और बाजार के अनुकूल कौशल (Skills) कितना है।इस संदर्भ में, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन के सबसे शक्तिशाली इंजन के रूप में उभरा है। यह आलेख इस बात का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है कि कैसे TVET स्थानीय प्राथमिकताओं को पूरा करते हुए वैश्विक आर्थिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।यूनेस्को के अनुसार,  TVET के अंतर्गत शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास की वे तमाम प्रक्रियाएं आती हैं जो विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित व्यावहारिक कौशलों, ज्ञान और समझ को विकसित करती हैं। पारंपरिक अकादमिक शिक्षा जहां सैद्धांतिक ज्ञान पर ध्यान केंद्रित करती है, वहीं TVET का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को सीधे रोजगार या स्वरोजगार के लिए तैयार करना है।इसमें डिजिटल साक्षरता, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य (Hospitality), कृषि तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं। आधुनिक परिदृश्य में, TVET केवल “ब्लू-कॉलर” नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उच्च-तकनीकी और प्रबंधकीय भूमिकाओं के लिए भी अनिवार्य बन चुका है।  स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता की बुनियादी इकाइयाँ होती हैं। TVET स्थानीय स्तर पर निम्नलिखित तरीकों से व्यापक प्रभाव डालता है:  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ होते हैं। TVET के माध्यम से प्रशिक्षित युवा इन उद्योगों को आधुनिक तकनीक अपनाने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, एक स्थानीय वेल्डर या कारपेंटर यदि आधुनिक कंप्यूटर- एडेड डिजाइन ($CAD$) या $CNC$ मशीनों का संचालन सीख जाता है, तो उसकी उत्पादकता और आय दोनों में भारी वृद्धि होती है।इतनी अधिक प्रासंगिकता के बावजूद, वैश्विक और स्थानीय स्तर पर TVET को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है: समाज में आज भी व्यावसायिक शिक्षा को पारंपरिक शैक्षणिक डिग्रियों (जैसे बीए, बीएससी, या सामान्य इंजीनियरिंग) की तुलना में कमतर आंका जाता है। इसे अक्सर उन छात्रों के विकल्प के रूप में देखा जाता है जो मुख्यधारा की शिक्षा में अच्छे नहीं हैं। कई देशों में टीवीईटी का पाठ्यक्रम पुराना हो चुका है, जो वर्तमान उद्योगों की अत्याधुनिक आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता।  उन्नत मशीनों और प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी विशेषकर विकासशील देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जाती है।  तकनीकी क्षेत्र में बदलाव इतनी तेजी से हो रहे हैं कि शिक्षकों को भी निरंतर अपस्किलिंग की आवश्यकता होती है, जो अक्सर नहीं हो पाती।

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