मोहर्रम की आहट के साथ ताज़िया निर्माण में जुटे कारीगर, दिन-रात मेहनत कर दे रहे आकर्षक स्वरूप

 

गाजीपुर/जमानियां । मोहर्रम पर्व नजदीक आते ही क्षेत्र के मुस्लिम बहुल इलाकों में धार्मिक उत्साह और रौनक बढ़ने लगी है। इमाम हुसैन की शहादत की याद में बनाए जाने वाले ताज़ियों के निर्माण का कार्य जोर-शोर से शुरू हो गया है। ताजियेदार और कारीगर दिन-रात मेहनत कर बांस, लकड़ी, कपड़े, रंग-बिरंगे कागज और चमकदार पन्नियों से आकर्षक ताज़ियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
ताज़िया निर्माण की प्रक्रिया अपने शुरुआती चरण में पहुंच चुकी है। बांस और शीशम तथा सागवान जैसी मजबूत लकड़ियों के ढांचे पर कपड़ों, रंगीन कागजों और सजावटी सामग्री की सहायता से गुंबदनुमा मकबरे का स्वरूप तैयार किया जा रहा है। नौवीं मोहर्रम तक ताज़ियों को पूरी तरह सजाकर तैयार कर दिया जाता है। इसके बाद शीशे, झालर और विभिन्न रंगों की कारीगरी से इन्हें भव्य एवं आकर्षक रूप प्रदान किया जाता है।read more:https://pahaltoday.com/the-strait-of-hormuz-will-not-be-opened-by-agreement-alone-removing-marine-mines-will-take-time/ताजियेदार मरहूम नेहाल शेख मंसूरी के छोटे भाई सलीम मंसूरी, नवासे दानिश मंसूरी, ताबिश मंसूरी, चचेरे भाई शाहिद जमाल मंसूरी तथा महफूज आलम ताज़ियों को सुंदर स्वरूप देने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ताज़िया पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला के मैदान में हुई शहादत की याद में बनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि नौवीं मोहर्रम का दिन इबादत और रोज़े के लिए विशेष महत्व रखता है, जबकि दसवीं मोहर्रम (आशूरा) को मातमी जुलूस निकाले जाते हैं। इन जुलूसों में ताज़ियों को अकीदत के साथ कर्बला तक ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है। इसके साथ ही अखाड़ों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं और ताजियेदार मोहर्रम के जुलूसों को शांतिपूर्ण एवं भव्य बनाने में जुटे हुए हैं।
मोहर्रम पर्व को लेकर क्षेत्र में धार्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है तथा ताज़िया निर्माण स्थलों पर लोगों की आवाजाही बढ़ गई है।

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