गाजीपुर । मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद की अध्यक्षता में जनपद में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कृषि अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, जिला प्रबंधक पीसीएफ तथा इफको के एरिया मैनेजर सहित संबंधित अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।read more:https://pahaltoday.com/childhood-extinguished-in-the-fire-of-enmity-the-brutal-murder-of-an-8-year-old-boy-in-bahraich-has-caused-a-sensation/बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित करते हुए कहा कि थोक विक्रेताओं से लेकर फुटकर विक्रेताओं तक उर्वरकों के एक्नॉलेजमेंट की व्यवस्था समय से सुनिश्चित की जाए तथा उर्वरक के साथ किसी अन्य उत्पाद की टैगिंग न की जाए। उन्होंने कहा कि डीबीटी प्रणाली के अंतर्गत वास्तविक कृषक का नाम दर्ज होना आवश्यक है, ताकि किसानों को निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को उनकी जोतबही, भूमि की आवश्यकता तथा फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी दुकानों पर रेट बोर्ड एवं स्टॉक बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में सर्वाधिक उपयोग होने वाले उर्वरक यूरिया की बिक्री निर्धारित मूल्य पर सुनिश्चित की जाए। यदि कोई विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य वसूलता है अथवा यूरिया के साथ अन्य कम प्रचलित उत्पाद खरीदने के लिए किसानों को बाध्य करता है, तो ऐसे विक्रेताओं के विरुद्ध रासुका के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने उर्वरकों के अवैध उपयोग एवं गैर कानूनी डायवर्जन पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। जनपद के सीमावर्ती विकासखंड जमानियां, रेवतीपुर, भदौरा, मोहम्मदाबाद तथा भांवरकोल की सीमाएं बिहार प्रांत से जुड़ी होने के कारण इन क्षेत्रों में उर्वरक की कालाबाजारी एवं अवैध परिवहन रोकने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर सचल दल गठित किए गए हैं। कृषि विभाग, पुलिस विभाग एवं प्रशासनिक विभाग की संयुक्त टीमें लगातार भ्रमण कर उर्वरक के आवागमन पर निगरानी रखेंगी।मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। किसान अपनी फार्मर रजिस्ट्री कराने के बाद ही उर्वरक क्रय करें तथा आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरक खरीदें।