संतकबीरनगर। भारतीय संस्कृति में तुलसी को केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि मानव जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का आधार माना गया है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद, वरिष्ठ साहित्यकार एवं चार विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. शुभदा पाण्डेय ने तुलसी के धार्मिक, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रत्येक परिवार से अपने घर में तुलसी का पौधा लगाने की अपील की है।कुशीनगर की पावन धरती पर जन्मीं डॉ. शुभदा पाण्डेय ने नागपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी एवं एम.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले चार दशकों से वे अध्यापन, शैक्षिक प्रशासन और शोध निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उनकी 35 मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों का गहन अध्ययन देखने को मिलता है।read more:https://pahaltoday.com/a-program-was-organized-on-the-theme-of-save-the-farm-campaign/डॉ. पाण्डेय ने कहा कि भारतीय परंपरा में घरों के आंगन और चौरे पर तुलसी स्थापित कर उसकी नियमित पूजा-अर्चना तथा संध्या समय दीप प्रज्वलन की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक आधार भी निहित है। उन्होंने बताया कि तुलसी वातावरण को शुद्ध करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने पद्मपुराण में वर्णित तुलसी महिमा का उल्लेख करते हुए बताया कि सनातन परंपरा में तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय तथा कलियुग के पापों का नाश करने वाली पवित्र वनस्पति माना गया है। तुलसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए शास्त्रों में इसे मोक्षदायिनी और कल्याणकारी बताया गया है। डॉ. शुभदा पाण्डेय के अनुसार तुलसी का वैज्ञानिक नाम ओसिमम सैंक्टम (Ocimum Sanctum) है। इसकी प्रमुख प्रजातियों में श्यामा तुलसी और रामा तुलसी शामिल हैं। इसके पत्तों और सुगंध में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो अनेक प्रकार के रोगाणुओं को नष्ट करने में सहायक होते हैं। आयुर्वेद में तुलसी को कफ, पित्त और वात के संतुलन के लिए उपयोगी माना गया है। चर्म रोगों, सर्दी-जुकाम, संक्रमण और विभिन्न प्रकार के दर्द में भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच तुलसी का महत्व और अधिक बढ़ गया है। तुलसी की पत्तियां वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन उत्सर्जित करती हैं। इसकी सूखी पत्तियां खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में भी सहायक होती हैं। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि तुलसी भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के बीच एक सशक्त सेतु है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, तुलसी जैसे पौधों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रत्येक परिवार से कम से कम एक तुलसी का पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि शुद्ध वायु, स्वस्थ जीवन और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का जीवंत प्रतीक है।