नगीना । रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र नगीना एवं केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र, मेरठ द्वारा खेत बचाओ अभियान एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर कार्यक्रम का आयोजित किया गया जिसमें किसानों को निम्न बिंदुओं पर विचारविमर्स किया गया। सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र नगीना एवं केंद्रीय आलू जी केंद्र, मेरठ द्वारा खेत बचाओ अभियान एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर कार्यक्रम का आयोजित किया गया जिसमें किसानों से निम्न बिंदुओं पर विचारविमर्स किया गया। गांव- मलकपुर अब्दुला एवं खानपुर में कृषि विज्ञान केंद्र नगीना एवं केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र, मेरठ द्वारा खेत बचाओ अभियान एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।read more:https://pahaltoday.com/pm-modi-said-in-mann-ki-baat-program-adopt-local-drinks-in-summer/उक्त कार्यक्रम विभिन्न जानकारी देते हुये बताया कि वर्ष में कम से कम एक बार हरी खाद या नवरत्न हरी खाद का प्रयोग करना चाहिए। प्रति एकड़ की दर से 5 से 10 टन सडी गोबर की खाद या 15 से 20 किलो कुंतल प्रति एकड़ की दर से वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करें| सबसे सस्ता सुलभ अजोला होता है| इसको अपने खेतों पर स्वयं उगा करके उसे उच्च गुणवत्ता की म बनाकर के अपने खेतों में प्रयोग करें| अपनी खेती में प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती में प्रयोग होने वाले अवयवों को शामिल करें।अपने घर पर ही प्राकृतिक जैविक रासायन एवं जैव खादों का निर्माण करे। इसके लिए प्रत्येक किसान अपने खेत पर वर्मीकम्पोस्ट इकाई, अजोला इकाई एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित इकाई स्थापित करे। अपनी उगाई जाने वाली फसल की पोषक तत्वों की मांग के अनुरूप ही पोषक तत्व प्रबंधन करें। पोषक तत्व प्रबंधन में रासायनिक उर्वरकों की पूर्ति एक ही उर्वरक से करने की जगह वैज्ञानिक अनुमोदन के अनुरूप अन्य रासायनिक उर्वरक विकल्प के साथ-साथ प्राकृतिक एवं जैविक खादों का प्रयोग करें। उक्त कार्यक्रम मे आलू अनुसंधान केन्द्र, मेरठ से प्रधान वैज्ञानिक डा. ध्रुव कुमार, डा. योगेश कुमार गुप्ता, कृषि विज्ञान केंद्र, नगीना से प्रभारी अधिकारी डा. के.के.सिंह, डा. प्रतिमा गुप्ता एवं डा. पिन्टू कुमार आदि ने जानकारी दी।