नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच भारी कूटनीतिक तनाव देखा गया। मध्य पूर्व में हाल ही में हुए 40 दिवसीय युद्ध को लेकर दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद रूस को हस्तक्षेप करना पड़ा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएई पर आरोप लगाया कि उसने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल को अपने सैन्य ठिकाने, हवाई क्षेत्र और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। ईरान का तर्क है कि उसने यूएई पर नहीं, बल्कि वहां स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आत्मरक्षा में हमला किया था। दूसरी ओर, यूएई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान ने उनके ऊर्जा ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर सीधे हमले किए हैं। तनाव तब और बढ़ गया जब इजरायली पीएम और यूएई के राष्ट्रपति के बीच कथित गुप्त बैठक की खबरें आईं, हालांकि यूएई ने इसे सिरे से नकार दिया। बैठक में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को बीच-बचाव कर मामला शांत कराना पड़ा। इस गतिरोध के कारण ब्रिक्स समूह पश्चिम एशिया संकट पर कोई सर्वसम्मत साझा बयान जारी करने में विफल रहा।read more:https://pahaltoday.com/mp-mahato-not-ready-to-accept-pm-modis-appeal/ मेजबान देश के रूप में भारत ने कूटनीति और शांति पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर व्यापारिक सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इस पूरे विवाद की जड़ें 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए उस संघर्ष में हैं, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इस 40 दिवसीय युद्ध ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है।