गाजीपुर । गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सोमवार को तहसील सेवराई के संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम पंचायत बिरऊपुर और हसनपुर पहुंचकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया तथा ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद तहसील सभागार जमानियां में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।निरीक्षण की शुरुआत गंगा के सबसे निकट स्थित ग्राम पंचायत बिरऊपुर से हुई। जिलाधिकारी ने खेतों में पहुंचकर जलभराव की स्थिति देखी। किसानों ने बताया कि खेतों में पानी घुसने से धान की फसल को नुकसान की आशंका है। इस पर जिलाधिकारी ने कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर पूरे क्षेत्र का तत्काल सर्वे कराने तथा फसल क्षति का आकलन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों के क्लेम की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाए, ताकि पात्र किसानों को समय से मुआवजा मिल सके।इसके बाद जिलाधिकारी हसनपुर गांव पहुंचे, जहां पंचायत भवन में ग्रामीणों, ग्राम प्रधान और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। ग्रामीणों ने नाव, पेयजल, दवाओं और पशुओं के चारे की समस्याएं उनके सामने रखीं। जिलाधिकारी ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए।डीएम ने ग्रामीणों से अपील की कि बाढ़ के दौरान पूरी सावधानी बरतें और गंगा नदी के किनारे बिल्कुल न जाएं। उन्होंने कहा कि नदी का प्रवाह तेज है और खतरा बना हुआ है। बच्चों को अकेले घर से बाहर न निकलने दें तथा सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/
पशुओं का टीकाकरण और चारे का पर्याप्त भंडारण
तहसील सभागार जमानियां में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने पशुपालन विभाग को बाढ़ प्रभावित गांवों में युद्धस्तर पर पशुओं का टीकाकरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान संक्रामक रोग फैलने की आशंका रहती है, इसलिए पहले से ही बचाव के उपाय किए जाएं। पशुओं के लिए भूसे और हरे चारे का पर्याप्त भंडारण भी सुनिश्चित करने को कहा गया।
बाढ़ शरणालयों में 15 दिन का खाद्यान्न रखने के निर्देश
जिला पूर्ति विभाग को निर्देश दिया गया कि बाढ़ प्रभावित गांवों के पंचायत भवनों और बाढ़ शरणालयों में कम से कम 15 दिनों के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री और स्वच्छ पेयजल का अग्रिम भंडारण कराया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बाढ़ की स्थिति में प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न और पेयजल के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
बाढ़ चौकियों पर डॉक्टरों की टीम और दवाओं की उपलब्धता
मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी बाढ़ चौकियों और शरणालयों पर चिकित्सकों की टीमें तैनात रहें। ओआरएस, क्लोरीन की गोलियां, बुखार, उल्टी-दस्त की दवाएं तथा एंटी-वेनम इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया। साथ ही गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर बीमार लोगों की सूची पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
जलमग्न मार्गों पर बैरिकेडिंग, नाव और लाइफ जैकेट की व्यवस्था
लोक निर्माण विभाग और तहसील प्रशासन को बाढ़ से प्रभावित एवं जलमग्न होने वाले मार्गों पर तत्काल बैरिकेडिंग लगाने तथा खतरे के निशान लगाने के निर्देश दिए गए। पर्याप्त संख्या में नाव, नाविक और लाइफ जैकेट की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। बाढ़ शरणालयों में बिजली, पेयजल और शौचालय की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के भी निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिला और तहसील स्तर पर 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जहां से गंगा के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों में नियंत्रण कक्ष के नंबर चस्पा कराने के निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में ग्रामीण तत्काल प्रशासन को सूचना दे सकें।निरीक्षण और बैठक के दौरान उप जिलाधिकारी जमानियां, तहसीलदार सेवराई, खंड विकास अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।