मासूम की मौत ने खोली स्कूल वाहनों की सुरक्षा की पोल जामिया फैज़ ए आम की बस पलटी, 9 वर्षीय छात्र की मौत,

आजमगढ़।देवगांव कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार सुबह स्कूली बच्चों से भरी बस के पलटने से 9 वर्षीय छात्र यूनुस बेलाल खान की दर्दनाक मौत ने पूरे जनपद को झकझोर दिया। कई अन्य बच्चे घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है। इस हादसे ने एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन नियमों के पालन और संबंधित विभागों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार जामिया फैज़ ए आम, देवगांव की स्कूल बस रोज की तरह बच्चों को लेकर वाराणसी, आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसही मोड़ तिराहे से गुजर रही थी। इसी दौरान बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसे के बाद बस के अंदर चीख पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण और राहगीरों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और बच्चों को बस से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने में मदद की।गंभीर रूप से घायल बनारपुर निवासी 9 वर्षीय यूनुस बेलाल खान को संयुक्त चिकित्सालय लालगंज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।घटना की सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य कराया, घायलों को अस्पताल पहुंचाया और क्रेन की सहायता से दुर्घटनाग्रस्त बस को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया। क्षेत्राधिकारी भूपेश पांडेय ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।read more:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/
हालांकि इस हादसे ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है।
क्या स्कूल बस की फिटनेस समय पर हुई थी?
क्या चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और आवश्यक अनुभव था?
क्या वाहन की नियमित तकनीकी जांच की जा रही थी?
क्या बस में सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था?
क्या संबंधित विभागों द्वारा स्कूल वाहनों का समय समय पर निरीक्षण किया जाता है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में स्कूल वाहन प्रतिदिन हजारों बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ते हैं, लेकिन उनकी फिटनेस, ब्रेक सिस्टम, टायर, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, सीसीटीवी, जीपीएस और अन्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं।ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि स्कूल वाहनों का नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो ऐसी कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। उनका कहना है कि किसी भी हादसे के बाद जांच बैठा देना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि दुर्घटना होने से पहले जोखिमों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए।लोगों ने मांग की है कि इस दुर्घटना की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए। यदि जांच में वाहन की फिटनेस, चालक की लापरवाही, स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी या किसी विभागीय स्तर पर नियमों के पालन में कमी सामने आती है, तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।साथ ही जिले के सभी निजी और सरकारी स्कूल वाहनों का विशेष सुरक्षा अभियान चलाकर निरीक्षण कराया जाए। जिन वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उनके विरुद्ध तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का असहनीय दुख न झेलना पड़े।एक मासूम की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि यह चेतावनी भी है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उनके बच्चे सुरक्षित स्कूल जाएं और सुरक्षित घर लौटें। यही जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और संबंधित विभागों की भी है।

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