ओबरा, सोनभद्र। तहसील ओबरा के ग्राम बिल्ली मारकुंडी स्थित मंगला स्टोन खदान में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने के आरोपों ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि खदान में निर्धारित मानकों और स्वीकृत सीमा की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मौन साधे हुए है। भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि, 2.010 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली इस खदान का पट्टा मंगला प्रसाद पुत्र लालजी, रामआसरे पुत्र हरिराम एवं रामजी वैश्य पुत्र कपूरचंद के नाम स्वीकृत है। शासन की ओर से प्रतिदिन 60 घन मीटर तथा प्रतिमाह अधिकतम 5 हजार घन मीटर बोल्डर खनन की अनुमति दी गई है। आरोप है कि खदान संचालक मात्र 10 से 12 दिनों में पूरे महीने का निर्धारित कोटा निकाल लेते हैं और इसके बाद भी खनन का कार्य लगातार जारी रहता है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि खदान से तय सीमा से कई गुना अधिक बोल्डर निकाले जा रहे हैं, जिससे सरकार को लाखों रुपए के राजस्व नुकसान की आशंका है।read more:https://pahaltoday.com/literature-scattered-on-the-street/ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार हो रही ब्लास्टिंग से पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है तथा आसपास के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि खनन पूरी तरह नियमों के अनुरूप हो रहा है तो वास्तविक खनन की मात्रा और रॉयल्टी का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि तय सीमा से अधिक खनन हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमित खनन संभव नहीं है। जनपद में पूर्व में कई खदानों पर अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है, इसके बावजूद मंगला स्टोन खदान को लेकर उठ रहे आरोपों ने प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एवं खनन विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, खदान प्रबंधन और संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।