कौन हैं पूर्व आईएएस सुजाता कार्तिकेयन? जिन्होंने थामा बीजेडी का हाथ; नवीन पटनायक ने दिलाई सदस्यता

भुवनेश्वर : ओडिशा की पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता कार्तिकेयन बीजू जनता दल में शामिल हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।सुजाता ने अपने प्रशासनिक करियर में मिशन शक्ति और ममता योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से राज्य के विकास में बड़ा योगदान दिया है।ओडिशा की जानी-मानी पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता राउत कार्तिकेयन ने गुरुवार को बीजू जनता दल (बीजेडी) का दामन थाम लिया।ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान सुजाता ने नवीन पटनायक का आशीर्वाद लिया और अपनी नई राजनीतिक जिम्मेदारी की शुरुआत की।सुजाता कार्तिकेयन 2000 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं।उनके पास ओडिशा के प्रशासन में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनकी शिक्षा की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। वह अपने कॉलेज की टॉपर रही थीं। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मास्टर डिग्री हासिल की। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग के समय उन्हें सर्वश्रेष्ठ अधिकारी प्रशिक्षु के लिए ‘अशोक बामावाले पुरस्कार’ मिला था।read more:https://pahaltoday.com/barabanki-festival-will-be-inaugurated-from-april-10/अपने प्रशासनिक करियर में सुजाता ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।जब वह सुंदरगढ़ जिले की कलेक्टर थीं, तब उन्होंने स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल वितरण कार्यक्रम शुरू किया था। उन्होंने बैंकों की मदद से यह योजना चलाई ताकि आदिवासी छात्राओं के स्कूल छोड़ने की दर कम हो सके। बाद में राज्य सरकार ने इस योजना को पूरे ओडिशा में लागू किया। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के बीच खेलों, खासकर हॉकी को बढ़ावा देने और खेल सुविधाओं को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई।साल 2006 में सुंदरगढ़ में मिड- मील योजना में अंडे शामिल करने का श्रेय भी सुजाता को ही जाता है। आगे चलकर राज्य सरकार ने इस पहल को बड़े स्तर पर अपनाया। वह कटक जिले की पहली महिला कलेक्टर भी बनीं। समाज कल्याण निदेशक के रूप में उन्होंने ‘ममता योजना’ को लागू करने में मुख्य भूमिका निभाई। यह योजना गर्भवती महिलाओं और नई माताओं की आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *