दान-यश, मान, कीर्ति, नम्रता और सरल सत्य स्वयं परमात्मा

गंगोह। शिव पुराण कथा में कथावाचक ने शिव महापुराण श्रवण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, धर्म और भक्ति का मूल है। पांच दान – यश, मान, कीर्ति, नम्रता और सरल सत्य स्वयं परमात्मा है। उन्होंने बताया कि कलयुग वास्तव में करयुग है। अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी। मोहल्ला महलतला के गीता भवन चलती देवी मंदिर में कथावाचक पंडित अवनीश वशिष्ठ, मोहल्ला कानून गोयान आर्य कन्या इंटर कालेज स्थित महादेव शिव मंदिर में कथावाचक सुधीर शर्मा व पंचायती दुर्गा झागड़ा मंदिर में कथावाचक पंकज सेमवाल ने कहा कि जो तन देखता है, शरीर देखता है वह सक्षम नहीं है। सक्षम वही है जो मन को देखता है, भाव को देखता है। संसार में सब कुछ सपना है।

read more:https://pahaltoday.com/weavers-to-be-empowered-by-modern-technology-handloom-industry-in-nandganj-gains-new-momentum/यह सब असत्य है, सत्य स्वयं राम है। कथावाचक ने उपदेश दिया कि परहित करो, सभी को जाग्रत करो, सम्मान करो, भजन करो, हंसते रहो, मस्त रहो और मुस्कराते रहो। उन्होंने बताया कि भगवान कभी भेद नहीं करते। शिव पुराण का पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। व्यक्ति के सभी प्रकार के कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं। जीवन के अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिवपुराण कथा में भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों और ज्योतिर्लिंगों का महत्व बताया गया। शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर माना गया है। कथावाचक ने भगवान शिव को प्रिय रुद्राक्ष का महत्व भी बताया। कथा आरंभ होने से पूर्व कथा व्यास का स्वागत कर तथा माला पहनाकर व्यास गद्दी पर बैठाया। कथा से पूर्व मंदिर परिसर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन संपन्न हुआ। मुख्य यजमानों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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