सहारनपुर। रामतीर्थ केंद्र, सहारनपुर की स्वर्ण जयंती के अवसर पर देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ के प्रथम संपूर्ण संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन किया। यह ऐतिहासिक अनुवाद रामतीर्थ केंद्र एवं साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ द्वारा तैयार किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का ऐतिहासिक उत्सव है। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी और संस्कृत का यह संगम भारत की सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक संवाद और सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने सभी से गुरु ग्रंथ साहिब के संदेशों को जीवन में अपनाने और जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/राज्यपाल ने साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री ‘यात्री’ की वर्षों की साधना और विद्वत्ता की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन, शोध और प्रेरणा का महत्वपूर्ण आधार बनेगी। उन्होंने आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, आचार्य गंगेश्वर नाथ प्रभाकर, डॉ. आभा प्रभाकर तथा संपूर्ण संपादकीय मंडल के योगदान की भी प्रशंसा की। समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, त्रिमूर्ति धाम कालका के संस्थापक ब्रह्मऋषि अमरदास, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, गौ सेवा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी कृष्णानंद, रामतीर्थ केंद्र के अध्यक्ष आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, डॉ. पी.डी. गर्ग, राजीव गुंबर, उमर अली खान, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित अनेक संत, विद्वान, आचार्य, शोधार्थी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रामतीर्थ केंद्र परिवार तथा इस ऐतिहासिक कृति के निर्माण से जुड़े सभी विद्वानों और सहयोगियों को सम्मानित करते हुए राज्यपाल ने उनके प्रयासों की सराहना की और इसे भारतीय ज्ञान परंपरा को नई ऊंचाई देने वाला महत्वपूर्ण कार्य बताया।