तमिलनाडु में महिला कर्मचारी को तीसरे बच्चे के जन्म पर तीन महीने का मातृत्व अवकाश 

तमिलनाडु में सरकारी नौकरी करने वाली महिला के यहां तीसरे बच्चे का जन्म होने पर मातृत्व अवकाश एक वर्ष करने के फैसले से तमिलनाडु ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। तमिलनाडु में जन्मदर घटने के कारण यह कदम उठाया गया है। एक वर्ष का मातृत्व अवकाश देने वाला तमिलनाडु पहला राज्य है। सरकारी नौकरी में मिलने वाली अनेक सुविधाओं में यह एक और बढ़ोत्तरी है। निजी कंपनियों में गर्भवती महिलाओं को सीमित छुट्टियां मिलती हैं, जबकि श्रम कार्य से जुड़ी महिलाएं प्रसव के आखिरी दिनों तक काम करती रहती हैं और नवजात के जन्म के बाद एक सप्ताह में ही उसे लेकर सब्जियां बेचने सहित अन्य कामों में लग जाती हैं।तमिलनाडु की विजय सरकार ने तीसरे बच्चे के पालनपोषण के लिए एक वर्ष के वेतन सहित अवकाश देकर स्वागत योग्य कदम उठाया है, लेकिन निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए भी गर्भावस्था सुरक्षा के बारे में विचार करना जरूरी था। लिमिटेड कंपनियों में मातृत्व अवकाश मिलता है। कुछ कंपनियों में छोटे बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर होते हैं, जहां बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था रहती है और उनकी मां दिन में पांच-छह बार उनसे मिलने आ सकती हैं। इन्फोसिस कंपनी में ऐसी व्यवस्था है, जिसे हम पहले से शिशुगृह कहते आए हैं।कानून के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर भी 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता है। तमिलनाडु के मानव संसाधन मंत्री सारथकुमार ने इसमें वृद्धि करके एक वर्ष का अवकाश दिया है। तमिलनाडु ने 365 दिनों के मातृत्व अवकाश की घोषणा उस समय की, जब विजय की पार्टी टीवीके की महिला विधायक आर. पल्लवी अपने छोटे बच्चे को लेकर विधानसभा पहुंची थीं।read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/
उन्होंने सदन की कार्यवाही में भाग लिया, जबकि पास के कमरे में एक केयरटेकर बच्चे की देखभाल कर रहा था। कुछ लोगों ने आलोचना करते हुए कहा कि पल्लवी दिखावा कर रही हैं। इस पर पल्लवी ने कहा था कि बच्चे को कहीं छोड़कर आना संभव नहीं है, महिला नेताओं की स्थिति समझने के बाद ही आलोचना करें।हालांकि पल्लवी पहली ऐसी महिला नेता नहीं हैं, जो विधानसभा या संसद में तीन महीने से छोटे बच्चे को लेकर पहुंची हों। वर्ष 2010 में इटली की राजनेता लिसिया रोंज़ुली अपनी 44 दिन की बेटी को लेकर यूरोपीय संसद में पहुंची थीं। 2010 से 2013 के दौरान विक्टोरिया संसद की कार्यवाही देखते-देखते बड़ी हुईं, ऐसा कहा जा सकता है। लिसिया यह दिखाना चाहती थीं कि काम और घर-परिवार के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न दुनिया की पहली ऐसी प्रधानमंत्री थीं, जो अपने तीन महीने के छोटे बच्चे को लेकर न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल हुई थीं। जब उन्होंने नेल्सन मंडेला पीस समिट में अपना भाषण दिया, तब उनका तीन महीने का बच्चा उनके पास खड़े पार्टनर के साथ था। भारत में भी लालू प्रसाद यादव की बेटी और सांसद मीसा भारती अपने केवल दो महीने के बेटे को लेकर संसद में आई थीं।छोटे बच्चे को संसद में साथ लाने का कोई विशेष अर्थ नहीं होता, लेकिन समाचारों की दुनिया में बने रहने के लिए ऐसा प्रयास किया जाता है। दुनिया के कुछ देशों में पहले बच्चे के जन्म से ही एक वर्ष से अधिक का मातृत्व अवकाश दिया जाता है। ये देश अपनी आबादी बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।एस्टोनिया, बुल्गारिया, स्वीडन, नॉर्वे आदि में एक वर्ष से अधिक का मातृत्व अवकाश दिया जाता है। एस्टोनिया में तो डेढ़ वर्ष की छुट्टी दी जाती है। बुल्गारिया में 410 दिन, जबकि स्वीडन में 480 दिनों का मातृत्व अवकाश मिलता है। जापान और दक्षिण कोरिया में भी एक वर्ष का मातृत्व अवकाश मिलने लगा है।आंध्र प्रदेश में राज्य सरकार ने उन दंपतियों के लिए विभिन्न प्रोत्साहन घोषित किए हैं, जो तीसरा बच्चा पैदा करते हैं। यहां आश्चर्य की बात यह है कि एक ओर भारत में जनसंख्या विस्फोट की चर्चा होती है, तो दूसरी ओर तीसरे बच्चे के लिए विभिन्न प्रलोभन दिए जा रहे हैं। ये प्रोत्साहन केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए हैं, लेकिन निजी कंपनियों में काम करने वाली तथा रोजाना फेरी लगाकर काम करने वाली महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती। प्रत्येक महिला को मातृत्व अवकाश का अधिकार देने की व्यवस्था खड़ी करना जरूरी है।यह निर्णय आने वाले समय में रोजगार बाजार में महिलाओं की स्थिति के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित कर सकता है।

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