एक देश-एक परीक्षा एलएलएम प्रवेश में भी किया जाए लागू 

भदोही। जिला उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने कहा कि देश में विधि शिक्षा को सरल, पारदर्शी और छात्र हितैषी बनाने की जरूरत अब और बढ़ गई है। वर्तमान में एलएलएम यानी मास्टर आफ ला में प्रवेश के लिए छात्रों को कई तरह की परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं। इस दौरान श्री रावत ने कहा कि आज स्थिति यह है कि कहीं सीएलएटी पीजी, कहीं एआईएलईटी पीजी, कहीं सीयूईटी पीजी, कहीं एसएलएस एआईएटी तो कहीं राज्य और विश्वविद्यालय स्तर की अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। हर परीक्षा के लिए अलग आवेदन फॉर्म, अलग शुल्क, अलग परीक्षा केंद्र और अलग तैयारी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि इस बिखरी हुई व्यवस्था का सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को ही उठाना पड़ रहा है। आर्थिक बोझ बढ़ता है, समय बर्बाद होता है और कई बार प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। श्री रावत ने पूरे देश के लिए एक समान प्रवेश परीक्षा के सुझाव दिए। कहा कि एक देश-एक परीक्षा की तर्ज पर एलएलएम प्रवेश के लिए पूरे भारत में केवल एक ही राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाए। इसी एक परीक्षा के आधार पर तैयार राष्ट्रीय मेरिट एवं स्कोर कार्ड से सभी संस्थानों में प्रवेश दिया जाए।read more:https://pahaltoday.com/consumers-booked-for-gas-refill-booking/इसमें राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली, केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय व  निजी विश्वविद्यालय शामिल हो। श्री रावत ने कहा कि एक आवेदन, एक परीक्षा से छात्रों को बार-बार फॉर्म नहीं भरने पड़ेंगे, आर्थिक बोझ में कमी आएगी और अलग-अलग फीस और यात्रा खर्च बचेगा, समय और संसाधनों की बचत और तैयारी एक ही दिशा में होगी, पारदर्शिता और निष्पक्षता में सभी के लिए समान नियम और मेरिट  होगी, समान अवसर के साथ देश के हर कोने के प्रतिभाशाली छात्र को बराबर मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब इंजीनियरिंग के लिए जेईई, मेडिकल के लिए नीट और अन्य कोर्स के लिए सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं, तो विधि में स्नातकोत्तर एलएलएम के लिए भी यही मॉडल अपनाया जाना चाहिए। यह केवल परीक्षा प्रणाली का सुधार नहीं है, बल्कि देश के लाखों विधि छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम होगा। श्री रावत ने कहा कि संबंधित संस्थाओं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, यूजीसी और नीति-निर्माताओं से मांग की जाती है कि इस दिशा में गंभीरता से विचार कर एक देश-एक एलएलएम प्रवेश परीक्षा को लागू किया जाए।

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