नई दिल्ली : दिल्ली में मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को फील्ड में कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, शकरपुर, जाफराबाद, चांद बाग और जगतपुरी समेत कई रिहायशी इलाकों में घर-घर जाकर किए जा रहे सत्यापन में बड़ी संख्या में घर बंद मिल रहे हैं या सूची में दर्ज मतदाता वहां रह ही नहीं रहे हैं। इससे मतदाता सूची को अद्यतन करने का कार्य अपेक्षा से अधिक जटिल हो गया है।शकरपुर के यू-ब्लॉक पार्ट-84 के बीएलओ केशव ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि मतदाता सूची में दर्ज कई पते अब पुराने हो चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में किरायेदार और मकान मालिक दूसरे इलाकों या राज्यों में स्थानांतरित हो चुके हैं। इसके अलावा सूची में दर्ज कई बुजुर्ग मतदाताओं का निधन हो चुका है, लेकिन उनके नाम अब भी रिकॉर्ड में बने हुए हैं। इन परिस्थितियों में प्रत्येक पते का सत्यापन करने और सही जानकारी जुटाने में काफी समय और मेहनत लग रही है। समयबद्ध अभियान ने बढ़ाया कार्यभार-एसआईआर अभियान के कारण बीएलओ पर कार्यभार काफी बढ़ गया है। तय समय सीमा के भीतर हजारों मतदाताओं का सत्यापन करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। दिनभर धूप और गर्मी में घर-घर जाने के बावजूद कई स्थानों पर ताले लगे मिलते हैं या लोग उपलब्ध नहीं होते। कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिल पाता, जिससे सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। read more:https://pahaltoday.com/after-hearing-the-arguments-of-advocate-girish-srivastava-and-examining-the-file-sufficient-grounds-for-bail-were-found/आरडब्ल्यूए बना बीएलओ का सहारा-फील्ड में आ रही चुनौतियों के बीच रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन्स (आरडब्ल्यूए) बीएलओ की मदद के लिए आगे आई हैं। कन्फेडरेशन ऑफ एनसीआर आरडब्ल्यूए, ईस्ट दिल्ली चैप्टर के सचिव अशोक शर्मा ने बताया कि कई इलाकों में आरडब्ल्यूए पदाधिकारी बीएलओ के साथ घर-घर जाकर सर्वे करा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर शिविर भी लगाए जा रहे हैं। उनके अनुसार स्थानीय निवासियों, मकान बदल चुके परिवारों और हाल ही में दिवंगत लोगों की जानकारी आरडब्ल्यूए के पास होने से सत्यापन कार्य में तेजी आ रही है।