नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसकी घोषणा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने की और बताया कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को इस अवधि के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार, इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा और बहस होगी। read more:https://pahaltoday.com/in-which-direction-are-raghav-chadhas-political-steps-moving-he-seems-interested-in-forming-his-own-party/मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों, नई नीतियों और देशहित से जुड़े अहम विषयों पर संसद में विस्तृत विचार-विमर्श होने की संभावना है। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदनों में पेश कर उन्हें पारित कराने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। सत्र को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाएगी। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन और अमेरिका से जुड़े व्यापारिक मुद्दों, परिसीमन, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के प्रस्ताव, भ्रष्टाचार के आरोपों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज जैसे विषयों पर सरकार से जवाब मांगेगा। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना भी बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र न केवल सरकार के विधायी एजेंडे बल्कि विपक्ष की रणनीति और संसद में होने वाले राजनीतिक विमर्श के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।