सशक्त भारत के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की अनिवार्यता

अनिकेत सिंह 
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जून को भारत के महान सांख्यिकीविद् प्रो. प्रशांत चंद्र (पी.सी.) महालनोबिस की जयंती पर मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य केवल उनकी स्मृति को नमन करना नहीं, बल्कि सांख्यिकी के महत्व, उसके वैज्ञानिक उपयोग तथा नीति-निर्माण और सुशासन में उसकी केंद्रीय भूमिका के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना भी है।read more:https://pahaltoday.com/the-book-vijay-purush-se-rashtraphari-rajnath-singh-will-be-released/प्रो. पी.सी. महालनोबिस (1893–1972) को भारतीय सांख्यिकी का जनक कहा जाता है। उन्होंने सांख्यिकी को केवल अकादमिक विषय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्रीय विकास का प्रभावी उपकरण बनाया। उनके द्वारा विकसित ‘महालनोबिस दूरी’ आज मशीन लर्निंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लस्टर विश्लेषण और पैटर्न पहचान जैसे आधुनिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रयुक्त हो रही है। बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षणों की वैज्ञानिक पद्धति को विकसित कर उन्होंने कृषि उत्पादन, उपभोक्ता व्यय, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जनकल्याण से जुड़े आंकड़ों के आकलन को अधिक विश्वसनीय बनाया। मानवविज्ञान के क्षेत्र में भी उनके अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए।संस्थागत निर्माण के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 1931 में स्थापित भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (आईएसआई) आज विश्व के अग्रणी सांख्यिकीय अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्रों में गिना जाता है। उनके प्रयासों से केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) तथा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) जैसी संस्थाओं की स्थापना हुई, जिन्होंने भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान किया। योजना आयोग के सदस्य के रूप में उन्होंने भारी उद्योगों और औद्योगिकीकरण पर आधारित प्रसिद्ध ‘महालनोबिस माडल’ प्रस्तुत किया, जिसने स्वतंत्र भारत की आर्थिक योजना को दिशा दी।भारत सरकार ने वर्ष 2006 में राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग की स्थापना कर सांख्यिकीय नीतियों, मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया। वर्तमान में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) देश की सांख्यिकीय व्यवस्था का प्रमुख नोडल मंत्रालय है। यह राष्ट्रीय आय, सकल घरेलू उत्पाद, रोजगार, उपभोक्ता व्यय, कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, आवास, बचत, निवेश तथा अन्य सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित आंकड़ों का संग्रह, विश्लेषण और प्रकाशन करता है। मंत्रालय आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, सर्वेक्षणों की वैज्ञानिक पद्धति विकसित करने तथा संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराने का भी दायित्व निभाता है।मंत्रालय का कार्यक्रम कार्यान्वयन प्रभाग सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस), 150 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निगरानी तथा आधारभूत संरचना और 20-सूत्रीय कार्यक्रम के क्रियान्वयन की समीक्षा करता है। वहीं सांख्यिकी प्रभाग राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सांख्यिकीय गतिविधियों में समन्वय स्थापित कर नीति-निर्माताओं को तथ्यपरक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराता है।आज जब भारत डिजिटल और डेटा-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब विश्वसनीय सांख्यिकी का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। गुणवत्तापूर्ण आंकड़े ही प्रभावी योजनाओं, पारदर्शी प्रशासन, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण तथा विकास कार्यक्रमों के निष्पक्ष मूल्यांकन का आधार बनते हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस केवल एक महान वैज्ञानिक की जयंती नहीं, बल्कि तथ्य आधारित शासन, जवाबदेही और समावेशी विकास के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है, तो सुदृढ़, पारदर्शी और आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगा। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है और यही प्रो. पी.सी. महालनोबिस को सच्ची श्रद्धांजलि भी।

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