सेशेल्स: समुद्री सौंदर्य, भारत की रणनीतिक साझेदारी और भारतीयों की मजबूत मौजूदगी

स्नेहा सिंह 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दिनों तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स गए थे, जहां वे देश की आजादी की स्वर्ण जयंती और नेशनल डे समारोह में मुख्य अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) बनने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। हिंद महासागर में स्थित 115 द्वीपों वाला सेशेल्स प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छ समुद्र, विशाल कछुओं और भारत के साथ मजबूत संबंधों के लिए जाना जाता है।करीब 1.30 लाख की आबादी वाले इस छोटे से द्वीपीय देश में हर वर्ष साढ़े तीन से चार लाख पर्यटक पहुंचते हैं। जर्मनी से सबसे अधिक पर्यटक आते हैं, जबकि भारत से भी लगभग 15 हजार लोग हर साल यहां घूमने जाते हैं। भारतीय नागरिकों को यहां वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है।सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया माहे द्वीप पर स्थित है। प्रास्लिन और ला डिग इसके अन्य प्रमुख द्वीप हैं। यहां का ‘कोको डी मेर’ दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी नारियल पैदा करता है, जिसका वजन 25 से 30 किलोग्राम तक होता है। अल्डाब्रा एटोल में डेढ़ लाख से अधिक विशाल कछुए पाए जाते हैं, जो 150 से 200 वर्ष तक जीवित रहते हैं। सेशेल्स के द्वीप ज्वालामुखीय नहीं, बल्कि करोड़ों वर्ष पुरानी ग्रेनाइट चट्टानों से बने हैं।भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले 2015 में भी यहां आ चुके हैं। उसी यात्रा में उन्होंने ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) विजन की घोषणा की थी। इस बार उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य नेशनल डे और स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेना था।read more:https://worldtrustednews.in/intensive-campaign-under-mission-shakti-phase-5-0-in-ghazipur-anti-romeo-team-activated/हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत और सेशेल्स समुद्री सुरक्षा तथा ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। भारत ने सेशेल्स को डोर्नियर विमान, रडार प्रणाली, फास्ट पेट्रोल वेसल, छह एम्बुलेंस और 10 यूटिलिटी वाहन उपलब्ध कराए हैं। साथ ही 155 मिलियन डालर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की है। असम्प्शन द्वीप पर नौसैनिक सहयोग से भारत को हिंद महासागर की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है।दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 80 से 85 मिलियन डालर का है। भारत चावल, दवाएं, सीमेंट, कपड़ा, चिकित्सा उपकरण, वाहन और प्रोसेस्ड फूड का निर्यात करता है, जबकि सेशेल्स से समुद्री उत्पाद आयात किए जाते हैं।सेशेल्स की आबादी का लगभग 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा भारतीय मूल का है। 15 हजार से अधिक भारतीय मूल के लोग यहां रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या गुजराती और तमिल समुदाय की है। ब्रिटिश शासन के दौरान गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी से व्यापारी और कारीगर यहां आकर बस गए थे। राजधानी विक्टोरिया में नवशक्ति विनायगर मंदिर भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। दिवाली, नवरात्रि, उत्तरायण और इंडिया-सेशेल्स डे जैसे आयोजन यहां बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।सेशेल्स के विकास में भारतीयों की अहम भूमिका रही है। यहां के अनेक होटल, सरकारी भवन, सड़कें और आवासीय परियोजनाएं भारतीय कंपनियों ने बनाई हैं। किराना और रिटेल व्यापार में भी भारतीयों का विशेष योगदान है। भारती एयरटेल 1998 से यहां संचार सेवाएं दे रही है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा 1978 से कार्यरत है।कोरोना महामारी के दौरान भारत ने मित्रता के प्रतीक के रूप में 50 हजार वैक्सीन डोज और चार टन जीवनरक्षक दवाएं मुफ्त भेजीं। भारतीय समुदाय नियमित रूप से चिकित्सा शिविर, शिक्षा, गरीबों के लिए आवास निर्माण और सामाजिक सेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहता है। यही कारण है कि सेशेल्स भारत को अपना विश्वसनीय और सबसे करीबी मित्र मानता है तथा दोनों देशों के संबंध समय के साथ और अधिक मजबूत होते जा रहे हैं।

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