मोहर्रम का चांद दिखते ही निकला पहला अखाड़ा जुलूस, ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंजा जमानियां

गाजीपुर जमानियां। मोहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी का आगाज हो गया। मोहर्रम की पहली तारीख पर बुधवार शाम कस्बे के विभिन्न इमामबाड़ों से पारंपरिक पहले अलम के साथ अखाड़ा जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए ‘या हुसैन’ और ‘या इमाम’ की सदाएं बुलंद कीं।read more:https://pahaltoday.com/the-essence-of-prasad-is-to-receive-the-blessings-of-the-deity-to-whom-it-is-offered/जुलूस से पूर्व नगर पालिका परिषद की ओर से कस्बा बाजार, इमाम चौक, प्रमुख मार्गों एवं गलियों की विशेष साफ-सफाई कराकर चुने का छिड़काव कराया गया, जिससे मोहर्रम के आयोजनों में किसी प्रकार की असुविधा न हो।मोहर्रम की पहली रात मजलिस और फातिहा के बाद अखाड़ा जुलूस निकाला गया। स्थानीय लोगों के अनुसार कस्बे में पिछले पांच से छह दशकों से मोहर्रम के अवसर पर अखाड़ा निकालने की परंपरा चली आ रही है। जुलूस में युवा और अखाड़े के सदस्य पारंपरिक लाठी एवं अन्य करतबों का प्रदर्शन करते हुए शहादत-ए-कर्बला की याद ताजा करते हैं।शाही जामा मस्जिद के सेक्रेटरी मौलाना तनवीर रजा और हाफिज तौहीद रजा ने बताया कि मोहर्रम की पहली तारीख को इमामबाड़ों से पहला अखाड़ा निकालने की परंपरा कर्बला के शहीदों की याद में निभाई जाती है। यह गम-ए-हुसैन का प्रतीक है, जिसमें मातमी धुनों के बीच हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया जाता है।उन्होंने बताया कि मोहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन 10वीं तारीख यानी यौम-ए-आशूरा होता है। इसी दिन कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य और इंसाफ की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की थी। उनकी याद में ताजिए और अखाड़ों के भव्य जुलूस निकाले जाते हैं। अमन और शांति बनाए रखने की अपील मौलाना तनवीर रजा ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी पूरी मानवता को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े रहने का संदेश देती है। उन्होंने लोगों से मोहर्रम के दौरान शरीयत के दायरे में रहकर इबादत करने, गरीबों की मदद करने, कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी और दुआख्वानी करने की अपील की। साथ ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश भी दिया।शुहदाए कर्बला की याद में बांटा जाएगा शरबतहाफिज तौहीद रजा ने बताया कि मोहर्रम की पहली तारीख को दूसरे खलीफा हजरत उमर फारूक (रज़ि.) की शहादत भी याद की जाती है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम के दिनों में शुहदाए कर्बला की याद में शरबत, लस्सी, फल और अन्य सेवाभावी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।वहीं, नूरी मस्जिद लोदीपुर के इमाम अशरफ करीम कादरी ने बताया कि पहली से दसवीं मोहर्रम तक मस्जिदों और घरों में कर्बला की दास्तान बयान की जाएगी। युवाओं द्वारा पौधारोपण, लंगर, शरबत वितरण तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे सामाजिक कार्य भी किए जाएंगे।मोहर्रम के अवसर पर निकले पहले अखाड़ा जुलूस में आरिफ खान, मोहम्मद जावेद खान, हयात वारसी खान, निशात खान वारसी, नेसार खान वारसी, मोहम्मद असलम समेत बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल रहे। जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और पूरे क्षेत्र में श्रद्धा एवं गम का माहौल बना रहा।

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