एक अधूरे युद्ध का अंत आखिरकार अनिवार्य ही था

स्नेहा सिंह 
खाड़ी युद्ध समाप्त होने से एक प्रकार की राहत और उत्सव का माहौल अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मन स्थिर रहे, यह अन्य देशों के लिए केवल श्रद्धा का विषय है, क्योंकि दुनिया में जिन नेताओं के दृष्टिकोण का कोई ठिकाना नहीं होता, उनमें ट्रंप शीर्ष पर हैं। वैसे इस खाड़ी युद्ध के समाप्त होने के संकेत पिछले सप्ताह से मिलने लगे थे। उस दिन ट्रंप ने अचानक बयान दिया कि ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला रद्द कर दिया गया है। किसी भी शक्तिशाली देश के लिए केवल मजबूत सेना और विशाल धनबल के आधार पर युद्ध जीत लेना संभव है, यह धारणा गलत है। पहले वियतनाम युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। ईरान के खिलाफ युद्ध में भी अमेरिका ने बड़ी मुश्किल से अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा बचाई है, जिसे ईरान ने कम से कम धूमिल तो कर ही दिया है।पिछले गुरुवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ईरान के तेल और गैस उद्योगों तथा खार्ग द्वीप पर शीघ्र ही कब्जा कर लिया जाएगा और अमेरिका उसी रात ईरान पर बड़ा हमला करेगा। इससे स्वाभाविक रूप से और भी जटिल युद्ध की व्यापक आशंका पैदा हो गई। हालांकि कुछ ही घंटों बाद उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है और बमबारी रद्द कर दी गई है।ट्रंप के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में एक समझौता हुआ है और अब दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं। युद्ध समाप्त हो चुका है। डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान उस समय आया जब कुछ ही घंटे पहले उन्होंने ईरान पर और अधिक भारी बमबारी तथा उसके तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की बात कही थी। अपने बयानों की ऐसी शीर्षासन मुद्रा वे बारबार करते रहे हैं और दुनिया को भ्रमित करते रहे हैं। यह मोहम्मद तुगलक का एक पश्चिमी संस्करण है।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच सहमत अंतिम बिंदुओं को कई देशों ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते में अमेरिका के साथ-साथ इजराइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्किए, बहरीन, कुवैत, जार्डन और मिस्र जैसे देश भी शामिल हैं। ट्रंप के अनुसार वार्ता ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंच चुकी है और हमले रोकने का निर्णय सभी पक्षों की मंजूरी के बाद ही लिया गया है। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता।read more:https://pahaltoday.com/mohsina-kidwai-passes-away-an-era-has-come-to-an-end/ट्रंप ने इसे अस्थाई लेकिन आवश्यक कदम बताया, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने अपने सैन्य बलों को खाड़ी क्षेत्र से वापस बुला लिया और ईरान ने भी नाकाबंदी हटाकर इस जलमार्ग को खोल दिया। इसके बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी की लहर दौड़ गई। यह घोषणा ऐसे समय में की गई, जब पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा था। दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों के कारण खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका व्यक्त की जा रही थी। लगातार हमलों और जवाबी हमलों के बाद स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन इस अचानक बयान ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया क्योंकि ईरान ने प्रारंभिक चरण में इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया था।वास्तव में ट्रंप की अनेक उतावली टिप्पणियों ने व्यापक वैश्विक प्रभाव वाली परिस्थितियां पैदा की हैं, फिर भी वे स्वयं गंभीर दिखाई नहीं देते। उदाहरण के लिए लगभग दो महीने पहले जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल हो गई थी, तब ट्रंप ने बारबार युद्ध की आग भड़काने वाली धमकियां दी थीं। इसके बाद अमेरिकी शेयर बाजार में 4,500 अंकों से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि जब भी वे हमलों की तीव्रता कम होने या सकारात्मक बातचीत की संभावना की बात करते हैं, तब शेयर बाजार में उल्लेखनीय उछाल देखा जाता है।ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है और सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए भी कोई सहमति नहीं बनी है। यह स्पष्ट रूप से दोनों देशों के बयानों के बीच गंभीर विरोधाभास को दर्शाता है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम और बढ़ जाता है। लेकिन बाद में इस नए सप्ताह की शुरुआत में ईरान ने समझदारी दिखाते हुए ट्रंप की बातों को मौन स्वीकृति दे दी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि यदि तनाव वास्तव में कम हुआ है तो यह बड़ी राहत की बात है, लेकिन यदि ये बयान केवल राजनीतिक दावे साबित होते हैं तो खाड़ी क्षेत्र की स्थिति फिर से तेजी से बिगड़ सकती है। अगले शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने तक स्थिति वैसी ही है जैसी होंठ और प्याले के बीच की दूरी, आशा तो की जा सकती है, पर निश्चितता नहीं।ट्रंप ने जिस प्रकार इस युद्ध की समाप्ति का ढोल पीटा, वैसी कोई ध्वनि तेहरान की ओर से सुनाई नहीं दी। 300 अरब डालर के खर्च पर अमेरिका ने ईरान को झुकाने के दावे किए हैं। इस युद्ध के दौरान ट्रंप का विस्तृत और विचित्र व्यक्तित्व भी दुनिया के सामने उजागर हुआ, जिसे युद्ध की एक अप्रत्यक्ष परिणति माना जाना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगभग प्रतिदिन ऐसा बयान देते रहे, जो कई स्तरों पर उथलपुथल का कारण बनता था।हालांकि वे आमतौर पर थोड़े ही समय बाद ऐसा बयान भी देते हैं, जो उनके अपने ही रुख का विरोध करता है या उसे वापस ले लेता है। विडंबना यह है कि उनके वैश्विक प्रभाव को देखते हुए ट्रंप के बयानों को पूरी तरह निरर्थक कहकर खारिज करना असंभव है और उन्हें पूरी तरह सुसंगत मान लेना भी कठिन है। अनेक देशों के नेता इस युद्ध के दौरान असमंजस और संकट की कई स्थितियों से गुजरे हैं। ट्रंप ने उन्हें अनुभव-संपन्न अवश्य बना दिया है!पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया के अधिकांश देशों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है और वे भी ट्रंप के रुख को लेकर चिंतित हैं। जब ट्रंप युद्ध समाप्त करने या युद्धविराम समझौते की संभावना की बात करते हैं, तो इससे शेयर बाजारों को राहत मिलती है और प्रभावित देशों में शांति तथा स्थिरता की आशा पैदा होती है। लेकिन ट्रंप मानो इससे अनजान हों, अगले ही दिन कोई विरोधाभासी या भ्रम पैदा करने वाला बयान दे देते हैं।

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