नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सामने आने से विमानन कंपनी से जुड़ा बड़ा विवाद फिर चर्चा में आ गया। बता दें कि कोर्ट ने स्पाइसजेट और उसके प्रवर्तक अजय सिंह की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने पहले दिए गए आदेश की समीक्षा की मांग की थी। इस आदेश के तहत उन्हें 144 करोड़ रुपए जमा करने को कहा था, जिसे लेकर उन्होंने राहत की गुहार लगाई थी। जानकारी के मुताबिक न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए स्पाइसजेट और अजय सिंह पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि मामला खारिज किया जाता है और पहले दिया गया आदेश लागू रहेगा। बता दें कोर्ट ने 19 जनवरी को स्पाइसजेट को कुल 194 करोड़ रुपए की स्वीकृत देनदारी में से 144 करोड़ रुपए छह सप्ताह के अंदर जमा करने का निर्देश दिया था। बाद में इस समय सीमा को 18 मार्च तक बढ़ा दी थी। बताया जा रहा है कि स्पाइसजेट और अजय सिंह ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कंपनी की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को यह भी प्रस्ताव दिया कि नकद राशि जमा करने के बजाय गुरुग्राम स्थित एक व्यावसायिक संपत्ति को गारंटी के तौर पर स्वीकार कर लिया जाए। साथ ही यह भी कहा कि केंद्र सरकार से कुछ सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि दूसरी ओर कलानिधि मारन और उनकी कंपनी कल एयरवेज ने इस पुनर्विचार याचिका का कड़ा विरोध किया।read more:https://pahaltoday.com/complete-the-incomplete-construction-work-within-the-time-limit-dm/उनका कहना था कि इसी तरह के तर्क पहले भी सुप्रीम कोर्ट में रखे जा चुके हैं और वहां उन्हें खारिज किया जा चुका है। ऐसे में इस आधार पर दोबारा राहत नहीं दी जानी चाहिए। मौजूदा फैसले के बाद साफ संकेत मिल रहा है कि कोर्ट इस मामले में पहले दिए गए निर्देशों को ही लागू रखना चाहती है और किसी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में अब स्पाइसजेट के लिए तय समयसीमा में राशि जमा करना या आगे की कानूनी रणनीति तय करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।