बिजनौर । गुरूवार को ग्राम रायपुर खादर के 85 प्रभावित परिवारों को कमलेश सैनी, पूर्व विधायक द्वारा राशन किट का वितरण किया जा रहा है। इसी क्रम में 14 अगस्त 2026 को ग्राम दत्तियाना के 49, जमालुद्दीनपुर के 35 तथा मीरापुर सीकरी के 140 प्रभावित परिवारों को राशन किट वितरित की जाएंगी। शेष राशन किट प्राप्त होने के उपरांत अवशेष प्रभावित परिवारों को भी राशन किट का वितरण सुनिश्चित कराया जाएगा। यह जानकारी उप जिलाधिकारी चांदपुर प्रशांत वर्मा ने दी। उप जिलाधिकारी चांदपुर ने बताया कि प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की निरंतर निगरानी की जा रही है तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। तहसील चांदपुर क्षेत्र में दिनांक 29 जुलाई 2026 से पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। जलस्तर बढ़ने से तहसील चांदपुर अंतर्गत मीरापुर सीकरी, सलेमपुर, दत्तियाना, सिंहाली, मुजफ्फरपुर खादर, जमालुद्दीनपुर, धीवरपुरा, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, कुम्हरिया, शुजातपुर खादर, खानपुर खादर आदि ग्रामों के खेतों में पानी भरने से कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है।read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/उन्होंने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए तहसील स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 02 मानव चालित नाव तथा 01 मोटरबोट की मांग की गई थी। जिसके क्रम में 01 अगस्त 2026 को 02 मानव चालित नाव तथा 08 अगस्त 2026 को 01 मोटरबोट तहसील चांदपुर को उपलब्ध करा दी गई। उक्त नावों एवं मोटरबोट को बाढ़ प्रभावित ग्रामों में राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया है।उन्होंने बताया कि 08 अगस्त 2026 के बाद गंगा नदी का जलस्तर और बढ़ने के कारण मीरापुर सीकरी, सलेमपुर, दत्तियाना, सिंहाली, मुजफ्फरपुर खादर, जमालुद्दीनपुर, धीवरपुरा, रायपुर खादर तथा कुम्हरिया आदि ग्रामों की आबादी में भी पानी भर गया, जिससे कुछ परिवार प्रभावित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों का राजस्व टीम द्वारा सर्वे कर सूचीबद्ध किया गया है। प्रभावित परिवारों को राशन किट एवं राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर से 500 राशन किट की मांग की गई, जिसके सापेक्ष 320 राशन किट प्राप्त हो चुकी हैं।उन्होंने बताया कि वर्तमान में गंगा नदी का पानी खेतों में भरा होने के कारण कृषि क्षति का आकलन किया जाना संभव नहीं है। जलस्तर कम होने एवं पानी उतरने के बाद राजस्व एवं कृषि विभाग के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से कृषि क्षति का सर्वे एवं आकलन कराया जाएगा तथा नियमानुसार पात्र प्रभावित किसानों को सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।