सूरतगंज-बाराबंकी। फतेहपुर ब्लॉक इलाके के गंगौला में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का मंगलवार को समापन हुआ, जहाँ कथावाचक चन्द्रशेखर महाराज ने भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित की। समापन के दौरान महाराज ने संतों की महिमा का बखान करते हुए कहा कि जिस प्रकार गंगा स्नान से तन और मन की शुद्धि होती है, उसी प्रकार संतों का समाज एक चलता-फिरता प्रयागराज है जिनके सत्संग मात्र से जीवन के समस्त कष्ट और दोष जड़ से मिट जाते हैं। कथा में उन्होंने मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप का स्मरण करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती के अलौकिक विवाह प्रसंग को जीवंत कर दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार देवर्षि नारद के मार्गदर्शन पर माता पार्वती ने कठिन तपस्या के माध्यम से महादेव को प्राप्त किया।read more:https://khabarentertainment.in/the-disabled-victim-set-out-on-a-march-to-lucknow-threatening-self-immolation/विवाह प्रसंग के दौरान भगवान शिव की विचित्र बारात का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने विस्तार से बताया कि कैसे महादेव ने सांपों का मौर, कुंडल और कंगन धारण कर, शरीर पर भस्म रमाकर और बाघंबर ओढ़कर अपना श्रृंगार किया। इस अनूठी बारात में जब श्रृंगी, भृंगी और भूत-प्रेतों को अपनी उपेक्षा का भय सताने लगा, तब भोलेनाथ ने अपने परम कृपालु स्वभाव का परिचय देते हुए समस्त भूत-पिशाचों को बारात में शामिल होने का निमंत्रण दिया। देवताओं से लेकर दानवों तक, इस अद्भुत विवाह के साक्षी बनने पहुंचे इस प्रसंग ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन पर भावपूर्ण आरती उतारी गई, जिसके पश्चात विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।