नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार ने साफ किया कि भविष्य में यदि एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे तथा ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी। सरकार ने यह भी साफ किया कि ई85 फ्यूल केवल फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स के लिए शुरू किया गया है, जिन्हें विशेष रूप से इस फ्यूल के लिए डिजाइन और सर्टिफाई किया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि इसका मतलब देश भर में पेट्रोल की सामान्य एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 फीसदी से आगे बढ़ाना नहीं है। मंत्री ने बताया कि एथेनॉल का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में पिछले सौ सालों से किया जा रहा है और ब्राजील जैसे देशों में लंबे समय से अधिक एथेनॉल ब्लेंड फ्यूल का इस्तेमाल हो रहा है। भारत में एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक और व्यापक परामर्श प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक वैज्ञानिक अध्ययन, फील्ड वैलिडेशन और वास्तविक उपयोग के अनुभवों से यह साबित हुआ है कि तय मानकों और वाहन निर्माता की सिफारिशों के मुताबिक इस्तेमाल किए जाने पर ई20 पेट्रोल सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से बेहतर फ्यूल है।read more:https://worldtrustednews.in/new-indias-new-up-will-not-have-any-memorial-or-fair-dedicated-to-a-foreign-invader-chief-minister/सरकार का कहना है कि यह निष्कर्ष केवल लैब रिसर्च पर नहीं, बल्कि देश भर में इसके व्यापक उपयोग के अनुभव पर आधारित है। सुरेश गोपी ने बताया कि ई15+ ब्लेंडेड पेट्रोल का देश में साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से और ई19-ई20 फ्यूल का ढाई साल से अधिक समय से उपयोग हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन फ्यूल्स पर चल चुकी हैं, लेकिन एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन में खराबी आने का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। सरकार ने बताया कि देश की एक प्रमुख पैसेंजर व्हीकल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-6 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें करीब 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन भी शामिल थे जो ई20 सर्टिफाइड नहीं थे। इसके बावजूद ई20 की वजह से इंजन डैमेज या किसी असामान्य घिसावट का कोई मामला सामने नहीं आया। इसी तरह एक प्रमुख टू-व्हीलर कंपनी ने भी अपने सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर बताया कि ई20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों में पुराने फ्यूल की तुलना में नुकसान की दर ज्यादा नहीं पाई गई।मंत्री ने कहा कि नीति आयोग, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), एआरएआई, आईआईपी और एसआईएएम की ओर से किए गए व्यापक लैब टेस्ट और फील्ड वैलिडेशन से भी यह पुष्टि हुई है कि ई20 फ्यूल इंजन में असामान्य घिसावट या तकनीकी अनुकूलता से जुड़ी कोई समस्या पैदा नहीं करता।सरकार ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम से देश को बड़ा आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिला है। इस योजना के जरिए अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, करीब 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, करीब 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया गया है।