रोहिणी कोर्ट में न्याय की मर्यादा तार-तार: जज और बार एसोसिएशन अध्यक्ष के बीच तीखी झड़प, कानूनी बिरादरी में भारी आक्रोश

देश की राजधानी दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था को हिलाकर रख देने वाला एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। दिल्ली के रोहिणी कोर्ट परिसर में सुनवाई के दौरान एक माननीय जज और अधिवक्ता के बीच तीखी बहस, गाली-गलौच और अभद्र व्यवहार की घटना ने पूरी कानूनी बिरादरी को स्तब्ध कर दिया है। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने अदालतों के भीतर की सुरक्षा और मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, कोर्ट रूम में नियमित सुनवाई चल रही थी, तभी किसी कानूनी बिंदु पर बहस इतनी उग्र हो गई कि दोनों पक्षों के बीच मर्यादा की सारी सीमाएं टूट गईं। बात इस कदर बिगड़ी कि रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर आसीन वकील ने जज को सरेआम ‘नशेड़ी’ तक कह दिया। माहौल में कड़वाहट इस कदर बढ़ गई थी कि मामला हाथापाई और शारीरिक टकराव तक पहुंचने ही वाला था, लेकिन कोर्ट रूम में तैनात अदालत कर्मियों और सुरक्षा स्टाफ ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए बीच-बचाव किया, जिसके बाद किसी तरह स्थिति को संभाला जा सका। इस अप्रत्याशित घटना के बाद से ही पूरे रोहिणी कोर्ट परिसर सहित दिल्ली के अन्य जिला न्यायालयों में वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के बीच भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। समन्वय समिति की आपात बैठक: दोषी न्यायिक अधिकारी पर अनुकरणीय कार्रवाई की मांग इस घटना के तुरंत बाद दिल्ली की सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली के सभी कोर्ट परिसरों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और सर्वसम्मति से एक निंदा प्रस्ताव पारित किया। समन्वय समिति ने अपने आधिकारिक बयान में उत्तर-पश्चिम जिला, रोहिणी न्यायालय के डीजे-04 (DJ-04) राकेश कुमार-V के आचरण की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है।read more:https://pahaltoday.com/strict-action-will-be-taken-against-black-marketing-of-fertilizers-nsa-will-be-imposed-on-charging-higher-prices/ वकीलों की संस्था का आरोप है कि उक्त न्यायिक अधिकारी का व्यवहार उस अधिवक्ता के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक, अशोभनीय और पूरी तरह से अस्वीकार्य था, जो न केवल एक वरिष्ठ वकील हैं बल्कि रोहिणी न्यायालय बार एसोसिएशन के निर्वाचित अध्यक्ष भी हैं। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, समिति ने मांग की है कि दोषी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कड़ी और अनुकरणीय दंडात्मक कार्रवाई की जाए। समन्वय समिति ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायिक संस्था की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला कोई भी व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से हस्तक्षेप की गुहार, पूरे बार ने दिखाई एकजुटता इस विवाद ने दिल्ली की निचली अदालतों में जजों और वकीलों के बीच के प्रशासनिक और व्यावहारिक संतुलन को भी सतह पर ला दिया है। समन्वय समिति ने बैठक के दौरान इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि पिछले कुछ समय से कुछ अन्य न्यायिक अधिकारियों के आचरण और कार्यप्रणाली के संबंध में भी लगातार विभिन्न शिकायतें मिल रही हैं। इस सिलसिले में, वकीलों की इस शीर्ष संस्था ने निर्णय लिया है कि वे बहुत जल्द दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेंगे और उनसे इस पूरे मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का अनुरोध करेंगे। समिति मुख्य न्यायाधीश से अपील करेगी कि वे अदालतों के भीतर उचित सुधारात्मक और संस्थागत उपाय लागू करें, ताकि भविष्य में इस तरह की अशोभनीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वकीलों का कहना है कि न्याय के मंदिर में आपसी सम्मान, गरिमा, निष्पक्षता और संस्थागत सौहार्द का माहौल बना रहना बेहद जरूरी है। बयान के अंत में समन्वय समिति ने साफ किया कि संपूर्ण जिला न्यायालय बार अपनी कानूनी बिरादरी के सम्मान, स्वाभिमान और सामूहिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से एकजुट है और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

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