अन्तर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस का हुआ आयोजन

धामपुर,(बिजनौर)। ईएलटीएआई रोहिलखंड चैप्टर एवं एसएएफई द्वारा अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन का सफल आयोजन ईएलटीएआई रोहिलखंड चैप्टर एवं सोसाइटी फॉर अकादमिक
फैसिलेशन व एक्सटेंशन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 23 मई 2026 को किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्वीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संस्कृति तथा तीव्र तकनीकी परिवर्तन के दौर में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञानों की बदलती भूमिका पर गंभीर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना था।
सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। सम्मेलन में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा लगभग 250 शोध-पत्र विभिन्न 12 तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किए गए। यह सम्मेलन समकालीन वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में अंतर्विषयी अध्ययन एवं अकादमिक सहयोग की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता है।read more:https://pahaltoday.com/theft-worth-lakhs-was-solved-within-hours-by-the-police-the-thief-turned-out-to-be-from-the-same-house/
सम्मेलन का शुभारंभ सम्मेलन की संयोजक एवं ईएलटीएआई रोहिलखंड चैप्टर की अध्यक्षा डॉ रेशू शुक्ला द्वारा स्वागत उद्बोधन एवं अतिथियों के परिचय के साथ हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने सभी विशिष्ट अतिथियों, मुख्य वक्ताओं, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों तथा समावेशी वैश्विक भविष्य के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सम्मेलन की विषयवस्तु की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए अंतर्विषयी अकादमिक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया। सम्मेलन में संरक्षक उद्बोधन एवं ईएलटीएआई रोहिलखंड चैप्टर का परिचय प्रोफेसर नीतू टंडन द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अंग्रेज़ी भाषा शिक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद, आलोचनात्मक चिंतन और वैश्विक समझ का सशक्त साधन है। उन्होंने ई एलटीएआई की शैक्षिक गतिविधियों एवं नवाचारी शिक्षण पद्धतियों की सराहना की। सम्मेलन को प्रोफेसर संध्या सक्सेना के आशीर्वचन से विशेष गरिमा प्राप्त हुई। उन्होंने  वास्तविक जीवन आधारित शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम तथा मूल्यपरक ज्ञान की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीक मानव सृजनात्मकता और मौलिक चिंतन का विकल्प नहीं बन सकती। उद्घाटन व्याख्यान प्रोफेसर सुधीर के अरोड़ा द्वारा दिया गया। उन्होंने सम्मेलन की विषयवस्तु में प्रयुक्त प्रत्येक प्रमुख शब्द का गहन एवं विश्लेषणात्मक विवेचन करते हुए मानविकी, साहित्य, भाषा, संस्कृति, तकनीक एवं वैश्विक भविष्य के अंतर्संबंधों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से स्पष्ट किया। सम्मेलन के मुख्य वक्ताओं में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान जुआन जोसे बरेला टेम्बरा तथा डॉ रीमा सोतलीकोवा शामिल रहे। प्रो. जुआन जोसे वरेला टेम्ब्रा स्पेन के सीईआईपी डी टेरियो में अंग्रेज़ी विभाग के प्रोफेसर एवं स्पेन में ट्यूटर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं डॉ. रीमा सोटलिकोवा वेबिस्टर यूनिवर्सिटी तथा न्यू उज़्बेकिस्तान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। दोनों विद्वानों ने अपने व्याख्यानों में भाषा, साहित्य, शिक्षण-पद्धति, डिजिटल शिक्षा तथा वैश्विक अकादमिक परिवर्तनों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार व्यक्त किए। सेफ संस्था का संक्षिप्त परिचय डॉ रमेश चंद्र द्वारा दिया गया। उन्होंने संस्था की अकादमिक सहयोग, शोध संस्कृति एवं बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।  सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण 12 तकनीकी सत्रों का सफल आयोजन रहा, जिनकी अध्यक्षता एवं संचालन देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों द्वारा किया गया। शोध-पत्रों में साहित्य एवं संस्कृति, जेंडर एवं पहचान, उत्तर-औपनिवेशिक अध्ययन, पारिस्थितिकी एवं इको-फेमिनिज़्म, भाषा एवं भाषाविज्ञान,नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साहित्य, डिजिटल ह्यूमैनिटीज़, मीडिया एवं संप्रेषण, डिजिटल युग में शिक्षा, नैतिकता एवं तकनीकी परिवर्तन जैसे विविध विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन के दौरान डिजिटल शिक्षाशास्त्र, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और साहित्यिक विमर्श, बहुभाषिक संप्रेषण, नारीवादी दृष्टिकोण, पारिस्थितिक चेतना, सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व तथा तकनीकी विकास के नैतिक पक्षों पर गंभीर अकादमिक चर्चा हुई। वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने मानविकी और तकनीकी विकास के संतुलित समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों का स्वागत डॉ शालिनी शर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों को सक्रिय अकादमिक संवाद एवं बौद्धिक सहभागिता हेतु प्रेरित किया। सम्मेलन का समापन डॉ रेशू शुक्ला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन, प्रतिवेदन प्रस्तुति एवं समापन विचारों के साथ हुआ। उन्होंने सभी मुख्य वक्ताओं, अतिथियों, सत्राध्यक्षों, शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ताओं, प्रतिभागियों, आयोजन समिति एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन भविष्य में भी अंतर्विषयी शोध, अकादमिक सहयोग एवं सार्थक बौद्धिक विमर्श को प्रेरित करता रहेगा। चैप्टर की संस्थापक टीम प्रोफेसर शालीन सिंह व डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह, के संयुक्त प्रयासों एवं कुशल नेतृत्व में सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न हुआ।

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