नीरज शर्मा पर दो बार हुआ हमला, बेटी ने मां को मारने चाचा संग रची साजिश

जयपुर। जयपुर में कोर्ट कर्मचारी नीरज शर्मा की हत्या की जांच में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। शुरुआत में जिस मामले को सड़क हादसा माना गया था, अब पुलिस उसे पहले से रची गई साजिश बता रही है। इस मौत के पीछे की बड़ी वजह अब सामने आई है। जांच में सामने आया है कि नीरज शर्मा को मारने की दो बार कोशिश की गई थी। पहली बार वह बच गईं। इसके बाद पूरी योजना बदल दी गई और कुछ दिन बाद उन्हें ऐसी जगह निशाना बनाया गया, जहां बचने का कोई मौका नहीं मिला। साथ में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि लड़की ने अपनी मां को मारने के लिए आगरा हाईवे पर स्थित करीब 5 बीघा की कीमती पैतृक जमीन का हिस्सा अपने चाचा और चचेरे भाई के नाम करने का वादा किया था। read more:https://khabarentertainment.in/ghosiya-nagar-panchayats-entire-system-collapsed-during-just-five-minutes-of-rain/ पुलिस के मुताबिक 3 जुलाई को हुई मौत से पहले आरोपियों ने नीरज शर्मा को उनके घर के बाहर ही कार कुचलने की योजना बनाई थी। इसके लिए किराए की महिंद्रा थार का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन उस दिन नीरज किसी तरह बच निकलीं थी। इस घटना के बाद नीरज डर गई। उन्हें लगा कि कोई उनका पीछा कर रहा है। अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए, ताकि आने-जाने वालों पर नजर रखी जा सके।   रिपोर्ट के मुताबिक हत्या वाले दिन नीरज शर्मा अपने 16 साल के दिव्यांग बेटे को कोचिंग सेंटर छोड़कर लौट रही थीं। इसी दौरान उनकी बेटी आयुषी शर्मा ने उन्हें फोन किया। पुलिस का कहना है कि आयुषी ने घर में जरूरी काम होने का बहाना बनाया और मां को तुरंत वापस बुलाया।  जैसे ही नीरज तय रास्ते से वापस आने लगी, पहले से निगरानी कर रहे लोगों ने स्कॉर्पियो में बैठे हमलावरों को इशारा कर दिया। जांच के मुताबिक स्कॉर्पियो करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पीछे से आई और नीरज शर्मा को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी तेज थी कि वह करीब 100 फीट दूर जाकर गिरीं। शुरुआत में पूरे मामले को सड़क हादसे की तरह दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक परिवार में विवाद की शुरुआत नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा की मौत के बाद हुई। विजय कुमार राजस्थान हाईकोर्ट में एलडीसी थे। परिवार ने अनुकंपा नियुक्ति नीरज शर्मा को देने का फैसला किया ताकि उनके 16 साल के दिव्यांग बेटे का भविष्य सुरक्षित रह सके। जांच में सामने आया कि आयुषी इस फैसले से नाराज थी और बाद में अपने चाचा मोहन स्वरूप के घर रहने लगी।    पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान चाचा मोहन स्वरूप और उसके फरार बेटे बलराम ने उसे अपनी तरफ कर लिया।  जांच के मुताबिक आयुषी ने आगरा हाईवे पर स्थित करीब 5 बीघा की कीमती पैतृक जमीन का हिस्सा अपने चाचा और चचेरे भाई के नाम करने का वादा किया था। पुलिस का मानना है कि यही लालच इस पूरी साजिश की वजह बना। शुरुआत में आयुषी ने खुद को दुखी बेटी की तरह पेश किया, लेकिन पुलिस का कहना है कि मोबाइल डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड, पूछताछ और चाचा के साथ हुए मैसेज ने पूरी कहानी बदल दी। अब पुलिस इस मामले को पहले से तय योजना के तहत की गई हत्या मानकर आगे की जांच कर रही है।

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