गाजीपुर/प्रयागराज। नोनहरा थाना क्षेत्र के रुकंदीपुर गांव निवासी सीताराम उपाध्याय की कथित हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने जिलाधिकारी गाजीपुर को पुनः नोटिस जारी कर मजिस्ट्रेट जांच की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।read more:https://pahaltoday.com/gujarat-prepares-for-centenary-commonwealth-games-donald-rukare-leads-team-to-visit/
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोनहरा थाना क्षेत्र के रुकंदीपुर निवासी सीताराम उपाध्याय की 13 सितंबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों और स्थानीय स्तर पर इसे कथित कस्टोडियल डेथ का मामला बताया गया, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दाखिल की थी। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 सितंबर 2025 को इसे पंजीकृत कर सुनवाई शुरू की थी।हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) गाजीपुर की ओर से आयोग के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के अवलोकन के बाद आयोग ने पाया कि मामले में मजिस्ट्रेट जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है और जांच प्रक्रिया जारी है। इस स्थिति पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी गाजीपुर को जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया।आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि मजिस्ट्रेट जांच की संपूर्ण रिपोर्ट 15 जुलाई 2026 तक हर हाल में आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जब आयोग जांच रिपोर्ट का परीक्षण करेगा।सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में मानवाधिकार आयोग पहले भी कई बार जिलाधिकारी गाजीपुर से जवाब तलब कर चुका है। बताया जा रहा है कि मामले के पंजीकरण से लेकर अब तक आयोग द्वारा कई नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिससे स्पष्ट है कि आयोग इस कथित हिरासत में मौत के मामले को गंभीरता से ले रहा है।मामले पर कानूनी और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सीताराम उपाध्याय की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसी स्तर पर जवाबदेही तय होती है या नहीं।यह मामला एक बार फिर पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और मानवाधिकार संरक्षण के मुद्दे को केंद्र में ले आया है। आयोग की आगामी सुनवाई में इस प्रकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।