गंगा चेतावनी बिंदु से ऊपर, खतरे के निशान से नीचे; एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर

जमानियां। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के चलते गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ाव जारी है। शनिवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 62.210 मीटर दर्ज किया गया। नदी का पानी अब चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर से ऊपर पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 63.105 मीटर है। जलस्तर में करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव जारी है।जमानियां कस्बा स्थित पक्का बलुआ घाट पर गंगा का पानी पांच सीढ़ियों को पूरी तरह डुबो चुका है। घाट के निचले हिस्से में भी पानी पहुंच गया है। महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए अंतिम सीढ़ी के पास निर्माणाधीन चेंजिंग रूम भी पानी की चपेट में आने की स्थिति में है। गंगा का पानी अब तटवर्ती गांवों के खेतों और निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा है। इससे किसानों को फसल प्रभावित होने के साथ ही भूमि कटान की चिंता सताने लगी है।जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए तहसील प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है और तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी गई है।
read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत शिविरों को भी आवश्यक सुविधाओं के साथ तैयार रखा गया है।घाट पर श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ाई गई है। पालिका अध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि पक्का बलुआ घाट पर सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग लगाने की कार्रवाई की जा रही है। तब तक मछुआरों को घाट के आसपास तैनात किया गया है, ताकि कांवड़िया श्रद्धालुओं एवं अन्य लोगों के साथ किसी तरह की अनहोनी न हो।आपदा विशेषज्ञ अशोक राय (डीडीएमए/ईओसी, कलेक्ट्रेट गाजीपुर) के अनुसार, वर्तमान समय में गंगा नदी चेतावनी बिंदु से ऊपर और खतरे के निशान से नीचे बह रही है। जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव जारी है।गंगा के जलस्तर का सामान्य स्तर 59.906 मीटर, चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर, खतरा बिंदु 63.105 मीटर और उच्च बाढ़ स्तर 65.220 मीटर निर्धारित है। वर्ष 2025 में गंगा का उच्चतम बाढ़ जलस्तर 64.690 मीटर दर्ज किया गया था। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बनी हुई है।

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