गाजीपुर जखनियां । जखनिया विकास खंड क्षेत्र में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और फर्जी हाजिरी लगाए जाने के आरोप सामने आने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। आरोप है कि कागजों और ऑनलाइन पोर्टल पर मजदूरों की नियमित उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि वास्तविकता में कार्यस्थलों पर मजदूर दिखाई ही नहीं दे रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/tragic-road-accident-in-payagpur-young-water-supplier-dies-family-in-shock/
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्यों को गति देना है, लेकिन जखनिया क्षेत्र में योजना की मंशा को ही धता बताया जा रहा है। कई गांवों में बिना पर्याप्त मजदूरों के ही कार्य पूर्ण दिखाए जा रहे हैं और भुगतान प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहरा गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार मस्तफाबाद उर्फ बड़ागांव, कृत्ति सिंहपुर सहित कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं को लेकर आरजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। बावजूद इसके अब तक किसी प्रभावी जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बाद भी जांच केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाती है। मौके पर निरीक्षण के बजाय विभागीय स्तर पर फाइलों में ही कार्रवाई पूरी कर ली जाती है, जिसके चलते जिम्मेदार लोगों के हौसले बुलंद हैं। मामले में जब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) जखनिया से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने विस्तृत जानकारी जिला स्तर से प्राप्त करने की बात कही। वहीं जिला समन्वयक (डीसी) मनरेगा ने कहा कि शिकायतें संज्ञान में आई हैं और मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन पूर्व में भी कई बार दिए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर न तो किसी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही व्यवस्था में सुधार दिखाई दिया। ऐसे में अब ग्रामीणों का प्रशासनिक जांच प्रक्रिया से भरोसा कमजोर पड़ने लगा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यस्थलों का औचक निरीक्षण कराने तथा फर्जी हाजिरी और वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त पाए जाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र की जनता की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।