अशोक चक्र पर गाइडलाइंस बनाने की मांग पर सुनवाई से कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पर अशोक चक्र के प्रदर्शन को लेकर गाइडलाइंस बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह के मामलों में अत्यधिक भावुक होने के बजाय रचनात्मक कार्यों पर ध्यान देना ज्यादा जरुरी है। मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बाघची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि इन बातों को लेकर इतना भावुक होने की जरूरत नहीं है।read more:https://pahaltoday.com/mohsina-kidwai-passes-away-an-era-has-come-to-an-end/  आपका विचार अच्छा है, आपने अपनी बात रख दी है। अब यह संबंधित अधिकारियों पर निर्भर करता है कि वे क्या फैसला लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को समाज के लिए कुछ सकारात्मक और रचनात्मक कार्य करने चाहिए, जिससे व्यापक स्तर पर लाभ मिल सके। दरअसल, याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने अशोक चक्र के प्रदर्शन से जुड़ा एक मुद्दा उठाया था। उसने वाराणसी के एक चौराहे पर लगे अशोक चक्र की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि इसके स्वरूप को लेकर गलत संदेश जा रहा है। याचिकाकर्ता के मुताबिक एक बच्चे ने इसे “बंदर जैसा” बताया, जिससे उसे ठेस पहुंची। याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि राष्ट्रीय ध्वज पर अशोक चक्र के सही और मानक स्वरूप के प्रदर्शन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। हालांकि, कोर्ट ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए इसे नीतिगत मामला माना और कहा कि इस पर निर्णय लेना संबंधित अधिकारियों का काम है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायपालिका हर मुद्दे में दखल देने के बजाय ऐसे मामलों में कार्यपालिका की भूमिका को प्राथमिकता देती है। साथ ही कोर्ट ने संकेत दिया कि जनहित के मुद्दों को उठाते समय संतुलन और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जरुरी है।

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