लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में 22 जून 2026 को हुई दर्दनाक अग्निकांड की घटना के बाद आजमगढ़ जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने जनपद के सभी कोचिंग सेंटरों, कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थानों, लाइब्रेरी, ट्यूशन सेंटरों तथा अन्य शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संस्थानों में विशेष अग्नि सुरक्षा जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।जिलाधिकारी ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर निकायों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर संस्थानों की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। यह अभियान जनपद के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा।जांच के दौरान संस्थानों में उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों की स्थिति, उनकी वैधता और कार्यशीलता की पड़ताल की जाएगी। साथ ही भवनों में आपातकालीन निकास द्वार, अग्नि सुरक्षा संकेतक, विद्युत वायरिंग, विद्युत पैनल, शॉर्ट सर्किट से बचाव की व्यवस्था तथा फायर एनओसी की वैधता की भी जांच की जाएगी। जिन संस्थानों में अग्निशमन उपकरण उपलब्ध नहीं होंगे या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा होगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कोचिंग संस्थानों, कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्रों और लाइब्रेरी में अध्ययन करते हैं। ऐसे में इन संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी आपात स्थिति में विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था, पर्याप्त निकास मार्ग तथा प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता अनिवार्य होनी चाहिए।उन्होंने संबंधित संस्थान संचालकों को निर्देशित किया कि वे अपने भवनों में अग्निशमन यंत्रों की नियमित जांच कराएं, विद्युत व्यवस्था को सुरक्षित रखें तथा सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर छात्रों और कर्मचारियों को आपदा की स्थिति में बचाव के उपायों की जानकारी भी दें।read more:https://pahaltoday.com/the-essence-of-prasad-is-to-receive-the-blessings-of-the-deity-to-whom-it-is-offered/जिलाधिकारी ने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था का वास्तविक मूल्यांकन किया जाएगा। जहां भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर दूर कराने के निर्देश दिए जाएंगे। गंभीर लापरवाही मिलने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत कर भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से जनपद में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।