आजमगढ़।गरीबी, गंभीर बीमारी और समय पर पर्याप्त आर्थिक सहायता न मिल पाने की पीड़ा एक बार फिर सामने आई है। आजमगढ़ जनपद के मेहनगर तहसील क्षेत्र के तरवां थाना अंतर्गत रासेपुर ग्रामसभा निवासी 25 वर्षीय ईदू अली पुत्र नबी अली का शुक्रवार की रात घर पर ही निधन हो गया। वह पिछले लगभग एक वर्ष से माउथ कैंसर से जूझ रहे थे। परिजनों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज अधूरा रह गया और पिछले लगभग 15 दिनों से दवाएं भी बंद हो गई थीं।ईदू अली परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। वह छत ढलाई में इस्तेमाल होने वाली मिक्सर मशीन पर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। बीमारी बढ़ने के साथ उनकी रोजी रोटी छिन गई और परिवार पूरी तरह आर्थिक संकट में डूब गया। इलाज, दवाइयों और अस्पताल के खर्च ने परिवार की बची हुई जमा पूंजी भी खत्म कर दी।परिजनों के अनुसार बीमारी की जानकारी होने के बाद गांव और आसपास के लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए चंदा इकट्ठा किया। लगभग 1.99 लाख रुपये की आर्थिक सहायता जुटाकर उनका इलाज कराया गया। पीजीआई आजमगढ़ सहित कई अस्पतालों में जांच के बाद वाराणसी के टाटा अस्पताल में माउथ कैंसर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने आठ कीमोथेरेपी दी, जिससे कुछ समय तक इलाज चलता रहा, लेकिन ऑपरेशन के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था नहीं हो सकी। आर्थिक संसाधनों के अभाव में इलाज अधूरा रह गया और अंततःबीमारी ने उनकी जान ले ली।मृतक की पत्नी जरीना खातून ने बताया कि उन्होंने मदद की उम्मीद में कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए। उनके अनुसार मेंहनगर विधायक पूजा सरोज, सांसद धर्मेंद्र यादव, पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ तथा विधायक दुर्गा प्रसाद यादव सहित कई जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई गई। कुछ स्थानों से संस्तुति पत्र भी मिले, लेकिन परिवार का कहना है कि समय रहते आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी।read more:https://pahaltoday.com/bangladesh-foreign-minister-who-met-jaishankar-said-send-sheikh-hasina-back/परिवार का यह भी कहना है कि पूरे परिवार के अन्य सदस्यों का आयुष्मान कार्ड बना हुआ था, लेकिन किसी कारणवश ईदू अली का आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया। उनका मानना है कि यदि वह योजना के दायरे में आ गए होते या समय पर पर्याप्त सहायता मिल जाती, तो ऑपरेशन कराना संभव हो सकता था।ईदू अली अपने पीछे वृद्ध पिता नबी अली, पत्नी जरीना खातून, 15 वर्षीय पुत्र अमजद अली और पुत्री सना बानो को छोड़ गए हैं। परिवार पहले से ही दुखों से घिरा था। कुछ समय पहले उनके बड़े भाई की भी मुंबई में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो चुकी थी। अब परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य के निधन के बाद आजीविका और बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर गंभीर मरीजों तक सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ समय पर पहुंचना चाहिए। उनका मानना है कि यदि जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो कई परिवार ऐसे दुखद हालात से बच सकते हैं।इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों तक सरकारी सहायता, स्वास्थ्य योजनाएं और इलाज की सुविधा समय पर और प्रभावी ढंग से कैसे पहुंचाई जाए, ताकि इलाज के अभाव में किसी और परिवार का सहारा यूं न छिन जाए।