सोनभद्र। जिला मुख्यालय के प्रमुख शहर सोनभद्र नगर में जल निकासी की व्यवस्था को लेकर नगर पालिका और निर्माण एजेंसी के दावों में ही बड़ा विरोधाभास सामने आ गया है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मुकेश कुमार जहां करोड़ों रुपए की लागत से बने नाले का निर्माण पूरा होने और बारिश का पानी निर्बाध रूप से निकलने का दावा कर रहे हैं, वहीं नाला निर्माण कराने वाले सीएनडीएस विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ने उनके दावे को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। अधिकारी के मुताबिक, पन्नूगंज रोड पर बिजौली के पास करीब 900 मीटर नाले का निर्माण अभी बाकी है।ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब नाला निर्माण ही अधूरा है तो नगर के जल निकासी की व्यवस्था मुकम्मल होने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है। गुरुवार को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मुकेश कुमार ने इमरती कालोनी के पास हाईवे पर जमा पानी को लेकर सफाई दी। उनका कहना था कि यह पानी नगर के नालों से नहीं, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों गांवों से होकर बारिश का पानी आने के कारण जमा हुआ है। उन्होंने बताया कि नगर में जल निकासी के लिए करोड़ों रुपए की लागत से नाला निर्माण कराया गया है और निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। नाले के जरिए बारिश का पानी निर्बाध रूप से निकल रहा है। लेकिन ईओ के इस दावे के ठीक उलट सीएनडीएस के जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि नाला निर्माण अभी पूर्ण नहीं हुआ है। पन्नूगंज रोड पर बिजौली के समीप लगभग 900 मीटर नाला बनाया जाना बाकी है। निर्माण अधूरा होने के कारण नगर का पानी पूरी तरह बाहर नहीं निकल पा रहा है और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/
अधिशासी अधिकारी के दावे पर उठे सवाल
अगर नाला निर्माण पूरा हो चुका है और पानी निर्बाध रूप से निकल रहा है तो फिर बिजौली के पास 900 मीटर नाला निर्माण बाकी होने की बात सामने कैसे आ गई, और यदि निर्माण अधूरा है तो नगर पालिका की ओर से नाला पूरा होने का दावा क्यों किया गया। इन सवालों का जवाब फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों के पास नहीं है। वहीं, नगर के धर्मशाला चैक के पास फ्लाईओवर के नीचे सर्विस लेन, नई बस्ती समेत कई इलाकों में जमा पानी को लेकर भी नगर पालिका की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इन स्थानों पर जलभराव का पानी आखिर कहां से आ रहा है और उसकी निकासी के लिए क्या व्यवस्था की गई है, यह सवाल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
करोड़ों खर्च के बाद भी जलभराव से राहत नहीं
एक तरफ करोड़ों रुपए खर्च कर जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ बारिश होते ही नगर के कई हिस्से जलभराव की चपेट में आ जा रहे हैं। इससे न सिर्फ आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि नगर की जल निकासी व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लग गया है। नगर पालिका और सीएनडीएस के अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों ने करोड़ों रुपये की लागत से हुए नाला निर्माण की हकीकत पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग अधूरे नाले को कब तक पूरा कराते हैं और नगरवासियों को जलभराव की समस्या से वास्तविक राहत कब मिलती है।