अर्बन अस्पताल सील ओटी खुल गई तो स्वास्थ्य विभाग की चुप्प क्यों?

बरेली : स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और उसकी मंशा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रामपुर रोड स्थित अरबन हॉस्पिटल की ओटी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सील तोड़कर ओटी हॉल इस्तेमाल करने के आरोप सामने आए हैं। यदि विभागीय कार्रवाई के बावजूद सील की गई ओटी खोली गई, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज की तारीख तक इस मामले में एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई?मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र में अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आने का उल्लेख किया गया है। चिकित्सक की उपलब्धता से लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं और मानकों तक पर सवाल उठाए गए। ऐसे में यदि विभाग ने ओटी को सील करना जरूरी समझा था तो सील लगने के बाद उसे खोलने की कथित घटना को स्वास्थ्य विभाग ने किस आधार पर नजरअंदाज कर दिया?आखिर सील किसके आदेश पर लगी थी, सील की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी और यदि सील टूटी या हटाई गई तो जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभाग ने मौके का निरीक्षण किया? पंचनामा बनाया? सील तोड़ने की पुष्टि हुई या नहीं? यदि पुष्टि हुई तो मुकदमा दर्ज कराने में देरी क्यों?यही सवाल अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/एक तरफ विभाग छापेमारी कर अस्पतालों को सील करने की कार्रवाई करता है, दूसरी तरफ उन्हीं सील की गई व्यवस्थाओं के दोबारा इस्तेमाल के आरोप लगने के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है। इससे आम आदमी के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित तो नहीं?स्वास्थ्य विभाग पर सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह कार्रवाई के बाद भी कथित तौर पर व्यवस्थाएं दोबारा संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, उससे विभाग को इन आरोपों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।सूत्रों का दावा है कि बरेली में स्वास्थ्य विभाग की लगातार छापेमारी के बाद कई कथित मानकविहीन और फर्जी अस्पताल कुछ समय बाद फिर से खुल जाते हैं। अगर यह दावा गलत है तो विभाग बताए कि अब तक सील किए गए कितने अस्पतालों की दोबारा जांच हुई, कितनों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और कितनों का संचालन वास्तव में पूरी तरह बंद कराया गया?मामला सिर्फ एक अस्पताल का नहीं है। सवाल मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था का है। अगर कोई अस्पताल सील होने के बाद भी सील तोड़कर संचालन करता है और विभाग एफआईआर तक दर्ज नहीं कराता, तो फिर सील लगाने की कार्रवाई का मतलब क्या रह जाता है?अब स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अरबन हॉस्पिटल की ओटी सील होने के बाद उसे खोले जाने की शिकायत पर क्या जांच हुई, क्या सील तोड़ने की पुष्टि हुई और यदि हुई तो आज तक एफआईआर क्यों नहीं कराई गई? कहीं ऐसा तो नहीं कि छापेमारी के दौरान सख्ती और उसके बाद कार्रवाई में नरमी के बीच कोई ऐसा खेल चल रहा है, जिसकी कीमत आखिरकार मरीजों को अपनी जान और जेब से चुकानी पड़ रही है? स्वास्थ्य विभाग द्वारा अर्बन हॉस्पिटल को जारी किए गए नोटिस में साफ तौर पर लिखा है की 31.7.2026 को मानक पूरे नहीं पाए जाने पर अस्पताल की ओटिस सील कर दी गई थी मगर 5 8.26 को को दोबारा निरीक्षण निरीक्षण के दौरान ओटी खुली पाई गई जो कि बिना किसी अनुमति या बिना किसी अधिकारी के संज्ञान में लायक होली गई उसके बाद पैथोलॉजी में जांच और ऑपरेशन भी हुए जब विभाग यह सारी चीज लिखकर अस्पताल से जवाब मांग रहा है तो अभी तक अस्पताल पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई है सबसे बड़ा सवाल यह है आखिरकार इसके पीछे ऐसा कौन है जिसे बचाया जा रहा है।

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