महादेव इंटरप्राइजेज पत्थर खदान में चल रहा अवैध खनन का खेल

सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र में संचालित  महादेव इंटरप्राइजेज पत्थर खदान में सारे नियम सहज ही दम तोड़ रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्र में ओबरा एसडीएम, वन विभाग के अधिकारियों के साथ ही स्थानीय थाना पुलिस की 24 घंटे मौजूदगी होने के बावजूद इस खदान से अवैध खनन व परिवहन का गोरखधंधा सरेआम चल रहा है। पट्टाधारक अरुण सिंह यादव की ऊंची पहुंच के आगे प्रशासनिक अधिकारी महज मूकदर्शक बने हुए हैं।खनन पट्टे की शर्तों, पर्यावरणीय स्वीकृति तथा उत्तर प्रदेश उपखनिज परिहार नियमावली-2021 के प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए श्री महादेव इंटरप्राइजेज पत्थर खदान से कराए जा रहे अवैध खनन व परिवहन को लेकर अनपरा निवासी चंदन कुमार दुबे ने सूबे के मुख्यमंत्री समेत खनन, पर्यावरण, वन, श्रम और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को रजिस्ट्री एवं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर जांच की मांग उठायी है। शिकायत कर्ता का कहना है कि इस खदान क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे, आरएफआईडी स्कैनर, चेक पोस्ट, धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव, श्रमिकों के लिए प्राथमिक उपचार एवं शौचालय जैसी व्यवस्थाएं नहीं हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्वीकृत पट्टा क्षेत्र से बाहर तथा वन भूमि एवं वन क्षेत्र की निर्धारित सीमा के भीतर खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।read more:https://pahaltoday.com/delay-in-justice-leads-to-failure-of-justice-prof-vijay-tiwaइसके अलावा जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित सुरक्षा क्षेत्रों में भी खनन किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि खनिज परिवहन ई-एमएम-11 प्रपत्र के बिना किया जा रहा है तथा डीएमएफ, टीसीएस एवं अन्य देय करों के भुगतान में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। तौल मशीन और परिवहन निगरानी प्रणाली में गड़बड़ी कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है। चंदन कुमार दुबे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि संबंधित पट्टेदार जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इससे शासन की खनन नीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे। पट्टा निरस्त करने की मांग शिकायतकर्ता ने शासन और संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, पर्यावरणीय स्वीकृतियों की समीक्षा करने तथा दोष सिद्ध होने पर खनन पट्टा निरस्त कर राज्य सरकार के अधीन लेने की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागों द्वारा जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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