सोनभद्र। नगर पंचायत डाला में महीनों से फैली दुर्गंध से परेशान जनता को आखिरकार रविवार को अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन के साथ बैठक का भरोसा मिला, लेकिन इस पूरी कवायद ने कई सवाल भी खड़े कर दिए। जिस समस्या को लेकर नगरवासियों में भारी आक्रोश है, उस पर खुली जनसुनवाई के बजाय नगर पंचायत कार्यालय में सीमित दायरे में बैठक कर समझौते का रास्ता निकाला गया।नगर पंचायत अध्यक्ष फुलवंती कुमारी ने दुर्गंध की समस्या को लेकर आंदोलन की चेतावनी देते हुए जिला प्रशासन को पूर्व में पत्र भेजा था। हालांकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए आंदोलन की अनुमति नहीं दी। इसके स्थान पर रविवार को सदर विधायक भूपेश चैबे की मौजूदगी में प्रदूषण विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और अल्ट्राटेक प्रबंधन के अधिकारियों की संयुक्त बैठक कराई गई। बैठक में नगरवासियों ने एक स्वर में कहा कि दुर्गंध की समस्या अब असहनीय हो चुकी है और केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। इसके बाद एक संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर कर सहमति बनी कि सभी पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जाएगा। कूड़ा परिवहन में ओवरलोडिंग नहीं होगी, वाहनों को ढककर चलाया जाएगा तथा समस्या की निगरानी के लिए एक टीम गठित की जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि जिन मुद्दों पर वर्षों से शिकायतें होती रही हैं, क्या उन पर अब तक नियमों का पालन नहीं हो रहा था।read more:https://pahaltoday.com/barabanki-festival-will-be-inaugurated-from-april-10/यदि नहीं, तो जिम्मेदार कौन है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। बैठक में इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। रामलीला मैदान से नगर पंचायत कार्यालय तक चला बैठक स्थल विवाद बैठक शुरू होने से पहले ही राजनीतिक और सामाजिक मतभेद खुलकर सामने आ गए। चेयरमैन फुलवंती कुमारी, सभासदों और समर्थकों ने रामलीला मैदान में कुर्सी-मेज लगाकर खुली बैठक कराने की मांग की। उनका तर्क था कि समस्या पूरे नगर की है, इसलिए चर्चा भी जनता के बीच होनी चाहिए। सूचना मिलते ही ओबरा एसडीएम विवेक कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और उच्च अधिकारियों के निर्देशों का हवाला देते हुए खुले मैदान में बैठक की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस दौरान कुछ लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप और समझाइश के बाद लोगों को नगर पंचायत कार्यालय ले जाकर बैठक संपन्न कराई गई। जनता का सवाल: दुर्गंध से कब मिलेगी राहत बैठक, समझौता और आश्वासनों के बीच सबसे बड़ा सवाल अभी भी बरकरार ह, क्या डाला की जनता को दुर्गंध से वास्तव में राहत मिलेगी या यह भी कागजी समझौते तक सीमित रह जाएगा। नगरवासियों का कहना है कि अब वे वादों से ज्यादा जमीनी कार्रवाई देखना चाहते हैं। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जनाक्रोश फिर सड़कों पर दिखाई दे सकता है। बैठक में ओबरा एसडीएम विवेक कुमार सिंह, प्रदूषण विभाग के एसडीओ जे.एन. तिवारी, सीओ सिटी रणधीर मिश्रा, अल्ट्राटेक के एडमिन हेड पीयूष शुक्ला, ईओ अखिलेश सिंह, चेयरमैन फुलवंती कुमारी समेत बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।