गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए जनजागरण अभियान तेज, गंगोह पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द

गंगोह। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए देशभर में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में उनकी गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा शनिवार को गंगोह विधानसभा क्षेत्र पहुंची, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। महादेव कुटी मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार रही है। उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि स्वयं को गौरक्षक कहने वालों के शासनकाल में भारत दुनिया के सबसे बड़े मांस निर्यातक देशों में शामिल हो गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश का भी बड़ा योगदान बताया जाता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए समाज को जागरूक होना होगा और मतदान के माध्यम से ऐसे जनप्रतिनिधियों का चयन करना होगा जो वास्तव में गौसंरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हों। उन्होंने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराना, प्रत्येक जिले में गौधामों की स्थापना करना तथा गौसेवा और गौसंरक्षण के लिए गौवीरों की नियुक्ति कराना उनकी यात्रा के प्रमुख उद्देश्य हैं। उन्होंने गौप्रेमियों से 24 जुलाई को लखनऊ में आयोजित होने वाले विशाल सम्मेलन में भाग लेने का आह्वान किया।read more:https://pahaltoday.com/american-president-under-siege/ इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों से हाथ उठवाकर गौसंरक्षण के प्रति समर्थन भी प्राप्त किया। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि जो व्यक्ति गाय की पीड़ा और हिंसा से दुखी होता है, वही सच्चे अर्थों में हिंदू है। उन्होंने ऋग्वेद का उल्लेख करते हुए हिंदू की व्याख्या भी प्रस्तुत की। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति दोनों की अपनी-अपनी सीमाएं और जिम्मेदारियां हैं, लेकिन जब राजनीति धर्म पर हावी हो जाती है तो समाज और राष्ट्र दोनों का नुकसान होता है। सभा में अनुसुइयां प्रसाद उनियाल ने भगवान बद्रीनाथ को अचल विग्रह और शंकराचार्य को चल विग्रह बताते हुए कहा कि जगद्गुरु बिना किसी निमंत्रण के जनकल्याण और धर्म जागरण के लिए गांव-गांव और गली-गली पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में आचार्य देवेन्द्र महाराज, साध्वी जगदम्बा और अनुज शास्त्री ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए गौसंरक्षण को राष्ट्रीय दायित्व बताया। वक्ताओं ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन की आधारशिला भी हैं। विशेष बात यह रही कि नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन नोमान मसूद ने मंच से इस अभियान का समर्थन करते हुए गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम में हमजा मसूद, जिला पंचायत सदस्य नरेन्द्र सिंह एडवोकेट, संदीप वर्मा, दीपांशु गोयल, राकेश गोयल, मनीष सीटू, नवीन कुमार सहित बड़ी संख्या में गौभक्त, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभा के दौरान गौसंरक्षण और राष्ट्रमाता अभियान को लेकर लोगों में उत्साह दिखाई दिया।

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