गाजीपुर जमानियां। भारतीय सेना के युवा अधिकारी कैप्टन प्रशांत चौरसिया (24) देहरादून में एक सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान अपने साथी सैनिक की जान बचाते हुए शहीद हो गए। इस वीरता पूर्ण बलिदान ने न केवल उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को उजागर किया, बल्कि पूरे क्षेत्र को गर्व और शोक में डुबो दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून में नदी पार करने के प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान एक सैनिक साथी रस्सी टूटने से नदी में गिरकर संकट में फंस गया। उसे बचाने के प्रयास में कैप्टन प्रशांत चौरसिया ने बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में छलांग लगा दी। हालांकि, साथी को बचाने की कोशिश में उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी।कैप्टन प्रशांत चौरसिया, कस्बा बाजार दुर्गा चौक निवासी पुरुषोत्तम चौरसिया के पुत्र थे और देहरादून स्थित 10वीं भैरव बटालियन में तैनात थे। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही पूरे कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई। व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं परिवार में कोहराम मच गया। माता सुमन चौरसिया और पिता का रो-रोकर बुरा हाल रहा।शहीद का पार्थिव शरीर बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर पुलिस और सेना के जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद 39 जीटीसी के जवान पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से पैतृक निवास लेकर पहुंचे, जहां सैकड़ों युवाओं ने तिरंगा लेकर “कैप्टन प्रशांत चौरसिया अमर रहें” के नारों के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि दी।पक्का बलुआ घाट स्थित श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई मयंक चौरसिया ने मुखाग्नि दी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, मुस्लिम समाज ने बरसाए फूल शहीद के पार्थिव शरीर के अंतिम यात्रा के दौरान पुरानी सट्टी बाजार स्थित सरदार खान की मस्जिद के पास मुस्लिम महिलाओं ने छतों से फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। सैकड़ों मुस्लिम बंधु अंतिम यात्रा में शामिल हुए और श्मशान घाट तक कंधे से कंधा मिलाकर साथ चले।इस भावुक दृश्य ने क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश की, जहां धर्म से ऊपर उठकर हर किसी ने शहीद को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कैप्टन प्रशांत चौरसिया का यह बलिदान देश सेवा की उस परंपरा को मजबूत करता है, जिसमें सैनिक अपने कर्तव्य के लिए सर्वोच्च बलिदान देने से पीछे नहीं हटते। उनका नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाएगा।