वांगचुक बोले-रिपोर्ट नॉर्मल है, इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं

 नई दिल्ली। लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा और अन्य अधिकारों की मांग को लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है।  बिगड़ती सेहत के बीच वांगचुक ने बुधवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर देश की जनता से आगामी 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की एक बेहद भावुक और बड़ी अपील की है। लगातार बढ़ते दबाव के बीच अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें देशभर से हजारों आम नागरिकों, समाज के बड़े- बुजुर्गों और विभिन्न राजनीतिक नेताओं के संदेश मिल रहे हैं कि वे अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दें। कुछ शुभचिंतकों ने तो कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है ताकि सरकार उन्हें जबरन खाना खिला सके।read more:https://khabarentertainment.in/major-action-by-the-food-safety-department-sauce-factory-raided-550-kg-of-stock-destroyed/इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अगर वे आज खाना खा लेते हैं तो इससे सरकार को यही संदेश जाएगा कि जनता के प्रति जवाबदेही की कोई ज़रूरत नहीं है; लोग बैठते हैं और खुद ही उठकर चले जाते हैं। अपनी शारीरिक स्थिति पर चिंतित समर्थकों को ढाढस बंधाते हुए उन्होंने बताया कि 18 दिनों के अनशन के बावजूद उनके मेडिकल टेस्ट के रिज़ल्ट्स काफी नॉर्मल हैं। शरीर में कमजोरी जरूर बढ़ रही है और मांसपेशियां (मसल्स) खत्म हो रही हैं, लेकिन उनका दिल अभी भी ठीक से काम कर रहा है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि वे अभी इतने कमजोर नहीं हुए हैं कि दो-चार दिन में हिम्मत हार जाएं, और वे इस अनशन को कई दिनों तक आगे खींच सकते हैं।वांगचुक ने देश की जनता से आग्रह किया कि वे सिर्फ उनसे अनशन तोड़ने के लिए न कहें, बल्कि खुद भी लद्दाख के इस हक की लड़ाई में एक छोटा कदम उठाएं। आगामी 20 जुलाई से देश की संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जिसे देखते हुए जंतर- मंतर पर पहले से ही परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चलो संसद अभियान के तहत एक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की तैयारी चल रही है। वांगचुक ने इस प्रदर्शन के साथ एकजुटता जताते हुए जनता से अपील की कि 20 जुलाई को सभी लोग इतनी बड़ी संख्या में यहाँ आएं कि सरकार तक एक अटूट संदेश पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब हम हज़ारों की संख्या में मिलकर लद्दाख के इस पूरे मुद्दे को देश की संसद के हवाले कर देंगे, तब उन्हें भरोसा हो जाएगा कि यह लड़ाई अब सही हाथों में चली गई है।

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