गगनयान और चंद्रयान-3 से जुड़े 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी

 नई दिल्ली।  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयान और चंद्रयान-3 जैसे अत्यंत महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों ने अंतरिक्ष विभाग की चिंता काफी बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों के भीतर 100 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा नौकरी छोड़ने के बाद, विभाग ने इस पलायन को रोकने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।  14 जुलाई को जारी एक नए आंतरिक मेमोरेंडम के जरिए वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे के नियमों को पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इसरो अपने सबसे बड़े मिशनों को अंजाम देने में जुटा है।read more:https://khabarentertainment.in/relief-rain-falls-from-the-sky-in-bhadohi-the-carpet-city/
इस्तीफा देने वालों में कई बड़े और अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा देता है। वीएसएससी से एलवीएम-3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ ने इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह, यूआरएससी से स्पैडेक्स प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने भी नौकरी छोड़ दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा रहे आदित्य रालापल्ली ने भी इस्तीफा दिया है। वह मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर (सिमुलेशन) थे, और उनकी टीम ने चंद्रमा पर लैंडिंग को सत्यापित करने के लिए 1 लाख से अधिक परीक्षण किए थे, जिससे लगभग 25 टेराबाइट डेटा तैयार हुआ था। इस्तीफों की इस लगातार बढ़ती हुई श्रृंखला को देखते हुए, प्रशासन ने 2020 में बनाए गए नियमों को रद्द कर दिया है।  पहले इसरो के सेंटर डायरेक्टर्स को ग्रुप ए के तकनीकी और वैज्ञानिक कर्मियों के इस्तीफे और वीआरएस को सीधे मंजूरी देने का अधिकार था। लेकिन नए आदेश के बाद, गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे अब सेंटर डायरेक्टर एक सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूर नहीं कर पाएंगे। अब ऐसे सभी मामलों को डायरेक्टर की सिफारिश के साथ अंतिम निर्णय के लिए सीधे अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) को भेजना अनिवार्य होगा। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना पर अचानक कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। रिपोर्ट के अनुसार, इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने इस्तीफों की बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, यह सच है कि कई लोग जा रहे हैं, लेकिन यह हर संगठन का एक सामान्य हिस्सा है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि नया मेमोरेंडम केवल लोगों को रोकने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है कि अचानक से कोई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रभावित न हो। उन्होंने विश्वास जताया कि अगर कोई जाता है, तो कोई दूसरा उसकी जिम्मेदारी संभालेगा और इसरो पूरी स्थिति को संभालने में सक्षम है। इसरो में वर्तमान में 14,600 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। हाल के इस्तीफे कुल कार्यबल का एक छोटा सा हिस्सा हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि ये लोग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों से जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *