पहल टुडे हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात रसूलाबाद सावन माह में भगवान भोलेनाथ की भक्ति अपने चरम पर है। इसी क्रम में शुक्रवार को असालतगंज से शिव शक्ति कांवरिया सेवा समिति के तत्वावधान में बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर, झारखंड) के लिए श्रद्धालुओं का विशाल कांवरिया जत्था धार्मिक उत्साह और भक्ति भाव के साथ रवाना हुआ। पूरे गांव में शिवमय वातावरण दिखाई दिया। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के गगनभेदी जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। ग्रामीणों ने सभी कांवरियों का तिलक कर, पुष्पवर्षा करते हुए उनकी मंगलमय यात्रा की कामना की।जत्थे को महंत मनोज कुमार तिवारी, प्रधान विरुहन के नेतृत्व में विधि-विधान से विदा किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की आरती उतारी गई और भगवान शिव से सभी की सुरक्षित यात्रा एवं सफल जलाभिषेक की प्रार्थना की गई।कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रधान मुमताज अहमद भोला के पुत्र लाला ने सभी कांवरियों को ठंडा पेयजल एवं कोलड्रिंक व फल वितरित किए। उन्होंने कहा कि शिवभक्तों की सेवा करना भगवान भोलेनाथ की सेवा के समान है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुखद एवं सुरक्षित यात्रा की कामना करते हुए बाबा बैद्यनाथ से सभी पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।महंत मनोज कुमार तिवारी के संरक्षण में यात्रा का नेतृत्व कर रहे गौरव द्विवेदी ने बताया कि कांवरिया जत्था सबसे पहले बिहार के सुल्तानगंज पहुंचेगा, जहां उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र गंगाजल भरा जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हुए झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर पहुंचेंगे और भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्षों से समिति के सदस्य इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते आ रहे हैं।उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पवित्र तीर्थ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने यहां भक्तों को मनोकामना पूर्ण करने का वरदान दिया है।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/ सावन माह में यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और गंगाजल अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर के खंड किए थे, तब उनका हृदय इसी स्थान पर गिरा था। इसी कारण देवघर को हृदय पीठ कहा जाता है। यह स्थान एक ओर जहां भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजनीय है, वहीं दूसरी ओर शक्तिपीठ होने के कारण माता सती की आराधना का भी प्रमुख केंद्र है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान शिव और माता शक्ति दोनों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है। सावन में यहां लगने वाला श्रावणी मेला विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में गिना जाता है, जिसमें लाखों कांवरिये पैदल यात्रा कर बाबा के दरबार में जल अर्पित करते हैं।कांवरिया जत्थे में दीक्षित, कुलदीप चौरसिया, हर्ष चतुर्वेदी, प्रदीप प्रजापति, पप्पू दुबे, विकास चौरसिया, शुभम त्रिवेदी शशांक मिश्रा, विनय तिवारी, रिंकू राठौर, पवन गुप्ता, अशोक राठौर, नीतू गुप्ता मनीषा गुप्ता अभिषेक अवस्थी, काका यादव, मोंटी राठौर, अंकित सविता, अनुराग चक्रवर्ती, अंशु, संजय कुशवाहा, अनुज वर्मा, अनुज कमल, पंकज दुबे, मंडल अध्यक्ष चंदन गुप्ता, मनीष गुप्ता, श्याम गुप्ता, बाबा तिवारी, बृजेश पालीवाल, क्षितिज राठौर, परशुराम वर्मा, छुनाकर तिवारी, कन्हैया शर्मा दुर्गेश गुप्ता, प्रमोद कमल, रोहित यादव, जीते वर्मा, गुड्डू मिश्रा, लल्ला तिवारी, मिथिलेश राठौर, वर्षा गुप्ता, अनिल चौरसिया, राजकुमार सविता, राहुल सहित सैकड़ों शिवभक्त शामिल रहे।रवाना होने से पूर्व ग्रामीणों ने सभी कांवरियों को तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा कर एवं भगवान भोलेनाथ के जयघोष के साथ विदा किया। सभी ने बाबा बैद्यनाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली तथा देश-प्रदेश के कल्याण की कामना की।