योगी सरकार आपदा में जान गंवाने वालों के परिवार को देगी अब आठ लाख की आर्थिक मदद

लखनऊ,  योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता के मानकों में बदलाव करते हुए मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी की है। अब प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को चार लाख रुपये के स्थान पर आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही फसल नुकसान, पशुधन की क्षति और मकान के नुकसान पर मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे। योगी सरकार का उद्देश्य आपदा प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल देने के साथ उनकी आजीविका को दोबारा पटरी पर लाना है।

मृतकों के परिजनों को दोगुनी सहायता, पशुधन पर भी बढ़ा मुआवजा
राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि को दोगुना कर दिया गया है। पहले चार लाख रुपये की सहायता दी जाती थी, जिसे बढ़ाकर अब आठ लाख रुपये कर दिया गया है। इसी तरह प्राकृतिक आपदा में गाय, भैंस, घोड़े या ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु होने पर मिलने वाली सहायता राशि 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए यह राशि चार हजार से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है। वहीं, मुर्गीपालकों को भी राहत देते हुए प्रति मुर्गी सहायता राशि 100 से बढ़ाकर 130 रुपये कर दी गई है। भार ढोने वाले पशुओं की क्षति पर सहायता राशि 20 हजार से बढ़ाकर 25,400 रुपये की गई है।

फसल नुकसान पर 30 फीसदी तक बढ़ा मुआवजा
योगी सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान की भरपाई के लिए भी सहायता राशि बढ़ाई है। अब सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 22 हजार रुपये कर दी गई है। इसी तरह वर्षा आधारित क्षेत्रों में फसल नुकसान की सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। बागवानी और कृषि वानिकी से जुड़ी फसलों के नुकसान पर मिलने वाली सहायता राशि 22,500 रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। रेशम उत्पादन से जुड़ी फसलों के लिए सहायता छह हजार से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर और गन्ने की फसल के लिए 7,500 से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। इसके अलावा कृषि भूमि के कटान और भूस्खलन जैसी आपदाओं से होने वाले नुकसान पर भी सहायता राशि के मानकों में बढ़ोतरी की गई है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette

10 लाख से अधिक किसानों को मिली राहत
राहत आयुक्त ने बताया कि एक अप्रैल से चार नवंबर-26 तक प्रदेश के 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों को राहत देने के लिए निर्धारित मानकों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं आपदा प्रभावित किसानों को समयबद्ध तरीके से मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए जिलों से नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके लिये सभी जिलाधिकारियों को एक अप्रैल से चार नवंबर तक हुए नुकसान का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्राकृतिक आपदाओं में मकानों और सार्वजनिक संस्थानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं। मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए अब 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। मैदानी क्षेत्रों में पक्के मकान के आंशिक नुकसान पर 93 हजार रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 1.03 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालयों के लिए 15.50 लाख रुपये की सहायता निर्धारित की गई है। वहीं, माध्यमिक विद्यालयों, छात्रावासों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के नुकसान की भरपाई के लिए 26 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए भी अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं।

राहत शिविरों में 30 दिन तक भोजन और आवास की सुविधा
आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने राहत शिविरों में मिलने वाली सुविधाओं के मानक भी तय किए हैं। सामान्य परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों को 30 दिनों तक भोजन, कपड़े, अस्थायी आवास और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए सहायता दी जा सकेगी। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 60 दिन या आवश्यकता के अनुसार बढ़ाई जा सकती है। पेयजल की आपात व्यवस्था के लिए सामान्य स्थिति में 30 दिन और सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक सहायता का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग, विस्फोट या दुर्घटना से होने वाले नुकसान को इस सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है। योगी सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों और किसानों तक सहायता पहुंचाने में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। व्यक्तिगत लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता राशि अनिवार्य रूप से सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इसके लिए लाभार्थियों की सूची और पात्रता का आधार सार्वजनिक करने की व्यवस्था की गई है, ताकि सहायता वितरण में पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक प्रभावितों को इसका लाभ मिल सके।

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