नन्हे कान्हाओं की मुस्कान में दिखी कृष्ण की छवि, भक्ति के रंग में रंगा

शेरकोट । श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व नगर में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी को लेकर लोगों में कई दिन पहले से ही उत्साह दिखाई देने लगा था। पर्व के दिन सुबह से ही घरों और मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गईं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर बच्चों से लेकर बड़ों तक में खासा उत्साह रहा।जन्माष्टमी पर नगर में सबसे आकर्षक नजारा उस समय देखने को मिला, जब घरों में नन्हे-मुन्ने बच्चों को कान्हा के रूप में सजाया गया। बच्चों को पीले वस्त्र पहनाए गए और उनके सिर पर सुंदर मोर मुकुट सजाया गया। हाथ में बांसुरी और गले में फूलों की माला लिए नन्हे कान्हा बेहद मनमोहक नजर आए। बच्चों के चेहरे पर खिली मासूम मुस्कान ने सभी का मन मोह लिया। उन्हें देखकर ऐसा लगा मानो बाल गोपाल स्वयं घर-आंगन में आ गए हों।कई परिवारों ने अपने बच्चों को राधा-कृष्ण की वेशभूषा में सजाया। बच्चों की सुंदर वेशभूषा और मासूम अदाओं को देखकर परिजन भी उत्साहित नजर आए। लोगों ने बच्चों की तस्वीरें खींचीं और उनके सुंदर स्वरूप को कैमरे में कैद किया। सोशल मीडिया पर भी बच्चों के कान्हा रूप की तस्वीरें साझा की गईं।नगर के विभिन्न मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गईं।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteमंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और आकर्षक सजावट से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम होते रहे।जन्माष्टमी के अवसर पर घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण के लिए विशेष पूजा की गई। लोगों ने कान्हा के लिए सुंदर झूले सजाए और उन्हें माखन-मिश्री, फल व अन्य पकवानों का भोग लगाया। महिलाओं ने भजन गाकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। बच्चों में भी जन्माष्टमी को लेकर खासा उत्साह रहा।रात में जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय हुआ, मंदिरों में घंटियां और शंख गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। जन्मोत्सव के बाद भगवान को भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।नगर में देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। बच्चे कृष्ण की वेशभूषा में इधर-उधर घूमते नजर आए। कहीं नन्हे कान्हा बांसुरी बजाते दिखाई दिए तो कहीं बच्चे राधा-कृष्ण की झांकी का हिस्सा बने। नन्हे बच्चों की मासूमियत और सुंदर वेशभूषा ने जन्माष्टमी के उत्सव में चार चांद लगा दिए।जन्माष्टमी का यह पर्व शेरकोट में केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि परिवारों के बीच प्रेम और खुशियों का अवसर भी बना। नन्हे कान्हाओं की मुस्कान और उनकी प्यारी अदाओं ने लोगों के दिल जीत लिए। पूरा नगर देर रात तक श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा रहा और चारों ओर कान्हा के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।

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