गुरु भ्रम संशय का अंत करता है : संजय अवस्थी 

लखनऊ: गुरु ज्ञान के सागर होते हैं गुरु मार्ग दर्शक होते हैं गुरु प्रकाश प्रतिनिधि होते हैं गुरु ज्ञान से जीवन आलोकित होता है गुरु प्रकाश जीवनोपयोगी ज्ञान है योगी जी की नई पाती पर उक्त उद्गार व्यक्त करते हुए संजय अवस्थी समाजसेवी ने कहा कि गुरु जीवन को दिशा दृष्टि प्रदान करते हैं गुरु शिक्षा से जीवन प्रकाश से भर जाता है संजय अवस्थी ने कहा कि ज्ञान प्राप्ति के लिए एकाग्रता और समर्पण भाव अति आवश्यक है।संजय अवस्थी ने कहा कि गुरु का स्थान सर्वोपरि माना गया है गुरु जीवन का अर्थ बताता है गुरु ही जगत से अवगत कराता है संजय अवस्थी ने कहा कि सूर्य का प्रकाश ज्योति का प्रकाश अंधकार का अंत कर देता है उसी प्रकार गुरु ज्ञान अंधकार का अंत कर जीवन को ज्ञान प्रकाश से भर देता है संजय अवस्थी ने कहा कि गुरु शिष्य को उद्देश्य व लक्ष्य का भान कराता है गुरु ही सभी जिज्ञासाओं का समाधान करता है गुरु ही सभी प्रश्नों को अच्छे ढंग से उदाहरण सहित समझाता है गुरु ही शिक्षित प्रशिक्षित कर निपुण सशक्त समर्थ बनाता है गुरु प्रतिभा को निखारता है सतत अभ्यास सतत परिश्रम से सफल जीवन का मार्ग दिखाता है।readmore:https://khabarentertainment.in/meritorious-students-honored-at-klgm-inter-college-incentive-amount-of-%e2%82%b961000-distributed/संजय अवस्थी ने कहा कि गुरु सृष्टि सृजन और सत्य से अवगत कराता है गुरु ही भ्रम संशय दुविधाओं का अंत करता है उचित अनुचित का विभेद बताता है गुरु विचारों को आधार देता है संजय अवस्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की नई पाती गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व का विषय लेकर आयी है यह हम सबके लिए गुरुजनों के प्रति श्रृद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का अवसर है।भारतीय मनीषा एवं सनातन संस्कृति में गुरु को साक्षात परम ब्रह्म माना गया है सनातन परम्परा में यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है बौद्ध परम्परा में यह भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और धर्मचक्र प्रवर्तन का स्मृति-दिवस है जैन परंपरा में इसका सम्बन्ध गौतम स्वामी के ज्ञान-दीक्षा प्रसंग से है सिख परम्परा में भी गुरु-वाणी सर्वोपरि है इसीलिए गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा एवं आध्यात्मिक चेतना का सार्वकालिक उत्सव है।प्रभु श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से ज्ञान और संस्कार प्राप्त कर आदर्श जीवन की मर्यादाओं को आत्मसात किया भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में रहकर ज्ञान प्राप्त किया कठोपनिषद में नचिकेता ने यमराज के समक्ष क्षणिक सुख और वैभव का नहीं, अपितु श्रेय अर्थात सत्य एवं आत्मज्ञान का मार्ग चुना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी अपनी पाती में लिखते हैं कि जहां गुरु का सम्मान होता है वहीं समाज उन्नति करता है इसी भावना के अनुरूप हमारी सरकार ने विगत नौ वर्षों में शिक्षक सम्मान एवं उनके सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है पारदर्शी भर्ती, समयबद्ध सेवा-सुविधाएं, आधुनिक डिजिटल संसाधन तथा निरन्तर क्षमता संवर्धन सुनिश्चित कर हमने अपने गुरुजनों को ऐसा समर्थ परिवेश देने का प्रयास किया है जहां वे ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण की अपनी भूमिका का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।शिक्षकों का सम्मान और उनका कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है पाती में मुख्यमन्त्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का उल्लेख किया गया है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आगे लिखते हैं कि वास्तव में, गुरु शिक्षा ही नहीं देते, जीवन को दिशा भी देते हैं गुरु स्वयं ज्ञान का आलोक हैं, जो शिष्य को अज्ञान रूपी तम से निकालकर सत्य, संस्कार और प्रकाश के पथ पर अग्रसर करते हैं मेरा आप सबसे विशेष आग्रह है कि अपने गुरुजनों का सदैव स्मरण रखें उनके दिए आदर्शों को जीवन में उतारें इससे आपका विकास सुनिश्चित होगा तथा विकसित प्रदेश का मार्ग भी तभी प्रशस्त होगा। संजय अवस्थी ने पाती को पथ प्रदर्शक बताया उन्होंने कहा कि प्रेरक पाती व्यापक जन जागरण लाएगी

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