आयोग ने प्रत्यावेदन का अध्ययन कर आवश्यकता अनुसार पुनः वार्ता करने का दिया भरोसा

लखनऊ।राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी एवं महामंत्री अरुणा शुक्ला ने 22 जून 2026 को केंद्रीय आठवें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारियों के वेतन संरचना में संशोधन, पेंशन बेनिफिट्स ,न्यूनतम वेतन निर्धारण, फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि, भत्तों एवं महंगाई भत्ते में संशोधन ,सेवानिवृत्ति के लाभ, वेतन विसंगतियों सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार के साथ अपना पक्ष रखा है। केंद्रीय आठवें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारियों की तरफ से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी एवं महामंत्री अरुणा शुक्ला ने पक्ष रखा। जे एन तिवारी ने आज एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया है कि वेतन आयोग लागू होने में मैक्रो इकोनॉमिक्स इफेक्ट के संबंध में विस्तार से चर्चा संयुक्त परिषद के प्रत्यावेदन में की गई है। वेतन संरचना को सामान्य एवं तकनीकी, दो वर्ग के कर्मचारियों में विभाजित करते हुए विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों पर निर्णय लेने पर विस्तृत विचार रखे गए हैं। शिक्षक, इंजीनियर, मिनिस्टीरियल , पुलिस संवर्ग, स्वास्थ्य कार्यकर्ता सचिवालय एवं मंत्रालयों में काम करने वाले कर्मचारी, स्टेनोग्राफर्स, प्रशासनिक कार्यों में सहायक कर्मचारी, ऑडिट एवं अकाउंट, आयकर, रिवेन्यू, डाक सेवाओं के प्रशासनिक कर्मचारी, रेलवे के नॉन टेक्निकल संवर्ग, पुलिस और पैरा मिलिट्री क्लर्कियल केडर, मंत्रालयों के नियुक्त कर्मचारी, वेलफेयर एवं सोशल सेवाओं में कार्य करने वाले कर्मचारियों के संबंध में प्रत्यावेदन में विस्तार से चर्चा की गई है। इसके अलावा तकनीकी संवर्ग में इंजीनियरिंग, वैज्ञानिक संवर्ग, रेलवे के तकनीकी कर्मचारी ,रक्षा विभाग के तकनीकी कर्मचारी, सिविलियन तकनीकी कर्मचारी, सूचना टेलीकम्युनिकेशंस, जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया, कृषि एवं पशुपालन ,सांख्यिकी औद्योगिक संस्थानों में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारी, शोध प्रयोगशालाओं में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारियों के वेतन संरचना में सुधार के सुझाव दिए गए हैं। संवर्ग के आधार पर वेतन संरचना में संशोधन करने के लिए पद के लिए निर्धारित योग्यता, तकनीकी योग्यता, रिस्क फैक्टर, पब्लिक डीलिंग, कार्य करने का दबाव, तकनीकी योग्यताएं , पदोन्नति में अवरोध का का मुद्दा उठाया गया है। सातवें वेतन आयोग के मैट्रिक्स सिस्टम को यथावत लागू रखने एवं न्यूनतम वेतन 60000 तथा अधिकतम वेतन 833250 किए जाने का प्रस्ताव संयुक्त परिषद के ज्ञापन में है। संयुक्त परिषद के ज्ञापन में न्यूनतम अधिकतम के बीच में अनुपात 1:13.89 का है, जोकि सातवें वेतन आयोग के बराबर है। इसके लिए सामान्य रूप से 3.333 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है।संयुक्त परिषद के प्रस्ताव में पांचवें वेतन आयोग में न्यूनतम एवं अधिकतम का अनुपात 1:10.7, छठे वेतन आयोग में 1:12 एवं सातवें वेतन आयोग के अनुपात 1:13.8 का जिक्र भी किया गया है।read more:https://pahaltoday.com/the-consumer-commission-settled-the-matter-by-giving-a-cheque-of-rs-55040/ भत्तों में संशोधन किए जाने के संबंध में मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता ,बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता, चिकित्सा भत्ता, जोखिम भत्ता, हिल एरिया भत्ता, स्पेशल ड्यूटी भत्ता, नाइट ड्यूटी भत्ता सहित विभिन्न भत्तों की विस्तार से चर्चा की गई है। सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को 01.01. 2026 से लागू किए जाने तथा 01 01. 2026 से ही पूरा एरिया का भुगतान देने की बात भी संयुक्त परिषद के प्रत्यावेदन में उठाई गई है। वार्षिक वेतन वृद्धि की दर पांच प्रतिशत रखे जाने तथा 50% महंगाई भत्ते को तत्काल मूल वेतन में समाहित किए जाने तथा महंगाई की दर आईडीसी पैटर्न पर रखने का प्रस्ताव भी संयुक्त परिषद के प्रतिवेदन में है। एसीपी को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रत्येक 5 वर्ष में प्रोन्नत के पद का वेतन मान दिए जाने का प्रस्ताव संयुक्त परिषद ने दिया है, जिन संवर्गों में पदोन्नति के पद नहीं है उन संवर्गों में प्रत्येक 5 वर्ष में अगले वित्तीय स्तरोन्नयन का प्रस्ताव किया गया है। प्रतीक 5 वर्ष में अनिवार्य रूप से पदोन्नति किए जाने तथा पदोन्नति नहीं किए जाने की स्थिति में अगला पदोन्नति वेतनमान दिए जाने का प्रस्ताव दिया गया है। पुरानी पेंशन को बहाल करते हुए पेंशन लाभों को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। अंतिम वेतन भुगतान की 50% के बराबर पेंशन का लाभ दिए जाने पूरे महंगाई भत्ते को न्यूट्रलाइज किए जाने तथा एक देश एक पेंशन एक रैंक एक पेंशन की मांग भी की गई है। बढ़ती उम्र के साथ पेंशन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी दिया गया है जिसके अंतर्गत 70 साल की उम्र के बाद 20% ,75 वर्ष पर 25% ,80 वर्ष पर 30%, 85 वर्ष से 40% ,90 वर्ष से 50% तथा 100 वर्ष पर 100% पेंशन में बढ़ोतरी की मांग भी रखी गई है ।पारिवारिक ग्रेच्युटी की वर्तमान सीमा 20 लाख से बढ़कर 50 लाख किए जाने तथा पेंशन बेनिफिट एवं ग्रेच्युटी तथा फैमिली पेंशन को टैक्स मुक्त किए जाने पर भी चर्चा की गई है। सभी पेंशनर्स को पूरे भारतवर्ष में कैशलैस इलाज की सुविधा दिए जाने तथा जीवन प्रमाण पत्र देने की डिजिटल प्रक्रिया को सरलीकृत करने का सुझाव भी दिया गया है। चिकित्सीय भत्ता, न्यूनतम वेतन, संविदा कर्मचारियों के संबंध में भी बृहद रूप से प्रस्ताव दिए गए हैं। संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नियमितीकरण नीति बनाए जाने की मांग करते हुए 3 से 5 वर्ष तक सेवा कर चुके संविदा कर्मियों को नियमित किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है ।महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव बढ़ाए जाने, कार्य स्थल पर सुरक्षा दिए जाने तथा उनके कठिन दिनों में विशेष अवकाश दिए जाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। आठवें वेतन आयोग से सामाजिक न्याय, आर्थिक सुरक्षा, प्रशासनिक दक्षता, समान अवसर एवं कर्मचारियों का सम्मान तथा पेंशन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना में सुधार तथा भत्तों पर निर्णय करने का अनुरोध किया गया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने देश के करोड़ों कर्मचारियों की पूरी बात गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ वेतन आयोग के समक्ष रखा है ।राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आठवें वेतन आयोग के सदस्य सचिव एवं आयोग की पूरी टीम का बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने विशेष रूप से समय देकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधि मंडल को सुना एवं उनके ज्ञापन पर कार्यवाही करने का भरोसा भी जताया। जे एन तिवारी ने आशा व्यक्त किया है कि आठवें वेतन आयोग की संस्तुति निश्चित रूप से कर्मचारियों के लिए एवं पेंशनर्स के लिए हितकारी होगी। यह जानकारी परिषद की महामंत्री अरुण शुक्ला ने आज लखनऊ में एक विज्ञप्ति प्रदेश जारी करके दिया है।

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