गंभीरपुर आजमगढ़। मानसून के बीच धान की रोपाई का सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है, लेकिन बिंद्रा बाजार क्षेत्र के किसानों के सामने सिंचाई का गहरा संकट खड़ा हो गया है। शारदा सहायक खंड 23 की नहरों और उनकी शाखाओं में पानी नहीं छोड़े जाने से हजारों बीघा कृषि भूमि सूखी पड़ी है। किसान तैयार नर्सरी लेकर खेतों की ओर उम्मीद से देख रहे हैं, लेकिन सूखी नहरें उनकी मेहनत और उम्मीद दोनों पर पानी फेर रही हैं।क्षेत्र के गंभीरपुर, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, बेला, शेखवलिया, भवतर, खरैला, गड़हा, कलंदरपुर, झीरुवा कमालपुर, सिद्धिपुर, थनौली, सलेमपुर, मंगरावा रायपुर, मखदुमपुर, सुरजनपुर सहित दर्जनों गांवों के किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि समय पर पानी नहीं मिला तो लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई धान की नर्सरी खेतों में लगाने से पहले ही खराब हो सकती है।कुछ किसान निजी पंपसेट और डीजल इंजन से किसी तरह सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है। डीजल की बढ़ती कीमतों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।किसानों का आरोप है कि हर वर्ष जब धान की रोपाई का समय आता है, तब नहरों में पानी की सबसे अधिक जरूरत होती है, लेकिन उसी समय नहरें सूखी रहती हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो इस वर्ष धान उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।read more:https://pahaltoday.com/a-unique-initiative-by-the-teachers-of-pm-shri-samvilian-vidyalaya-to-show-family-like-affection-towards-the-students/ग्रामीणों का कहना है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की बात करती है, लेकिन जब सिंचाई जैसी बुनियादी व्यवस्था ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी तो किसान खेती कैसे करेगा। किसानों का कहना है कि खेत तैयार हैं, नर्सरी तैयार है, मजदूर तैयार हैं, लेकिन पानी नहीं है।किसानों ने नहर विभाग के अधिकारियों से तत्काल शारदा सहायक खंड 23 की सभी शाखाओं में पानी छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं छोड़ा गया तो हजारों किसानों की फसल प्रभावित होगी और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।क्षेत्र के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो वे नहर विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, खेतों तक पानी चाहिए। क्योंकि धान की रोपाई का समय निकल गया तो पूरे वर्ष की मेहनत और उम्मीद दोनों बर्बाद हो जाएंगी।